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बदायूं के वजीरगंज में देवी मेले के दौरान हाईटेंशन लाइन के नीचे झूले लगाए जाने से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। मेला देखने आए परिवारों और स्थानीय दुकानदारों में अब डर का माहौल है। उनका कहना है कि अगर तेज हवा चली या कोई तकनीकी खराबी हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
मंगला मुखी माता मेला
Budaun: वजीरगंज नगर में लग रहे देवी मेले की रौनक इस वक्त लोगों को अपनी ओर खींच रही है, लेकिन इसी भीड़ और उत्साह के बीच एक बड़ा खतरा चुपचाप मंडरा रहा है। मंगला माता मंदिर परिसर में लगे ऊंचे-ऊंचे झूले सीधे हाई-टेंशन बिजली की लाइनों के नीचे चल रहे हैं। यही बात अब पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
मेला परिसर में लगे जायंट व्हील समेत कई बड़े झूले ऐसे स्थान पर लगाए गए हैं। जहां से ठीक ऊपर हाई-टेंशन बिजली की लाइन गुजर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि झूलों की ऊंचाई और बिजली के तारों के बीच की दूरी बेहद कम है। नियम साफ कहते हैं कि हाई वोल्टेज लाइनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना अनिवार्य है लेकिन यहां इन नियमों को नजरअंदाज किया गया है।
बदायूं के मंगला मुखी मंदिर मेले में ऊंचे झूले सीधे हाई-टेंशन बिजली की लाइनों के नीचे चल रहे हैं। स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी तकनीकी खराबी या तेज हवा में बच्चों और श्रद्धालुओं की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।@dmbudaun#Badaun #Wazirganj #FairSafety pic.twitter.com/1Nz8hxR2cE
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 2, 2026
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पूरी जांच के मेले को अनुमति दे दी। न तो झूलों की फिटनेस की स्पष्ट जानकारी सामने आई और न ही बिजली विभाग की कोई सार्वजनिक एनओसी दिखाई गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी लापरवाही को मंजूरी मिली?
यह पहला मामला नहीं है जब ऐसे खतरे सामने आए हों। जिले में पहले भी हाईटेंशन लाइन और झूलों से जुड़े हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही जारी है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या हर बार हादसे के बाद ही सिस्टम जागेगा?
मेला देखने आए परिवारों और स्थानीय दुकानदारों में अब डर का माहौल है। उनका कहना है कि अगर तेज हवा चली या कोई तकनीकी खराबी हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से तुरंत झूलों को बंद कर सुरक्षा जांच कराने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस खतरे को नहीं देख पा रहे, या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।