
ग्रीन टैक्स ने रोके ट्रक के पहिए!
Noida: दिल्ली-एनसीआर और नोएडा में इन दिनों ग्रीन टैक्स को लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ट्रांसपोर्टर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और कई जगहों पर ट्रकों की हड़ताल भी जारी है। कारोबारियों का कहना है कि पहले से महंगे डीजल-पेट्रोल और बढ़ती महंगाई के बीच अब ग्रीन टैक्स की बढ़ोतरी ने उनके कारोबार पर बड़ा असर डाला है।
नोएडा के सेक्टर-5 में स्थित पवन टेंपो ट्रांसपोर्ट के ऑनर ओमपाल सिंह ने डाइनामाइट न्यूज से खास बातचीत में ग्रीन टैक्स को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस टैक्स को वापस लेना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय और आम आदमी दोनों पर पड़ रहा है।
ग्रीन टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो मुख्य रूप से पुरानी डीजल गाड़ियों और कमर्शियल वाहनों पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना बताया जाता है। सरकार का तर्क है कि ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, इसलिए उन पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाता है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक यह टैक्स साल 2012-13 से लागू है, लेकिन अब इसमें बढ़ोतरी कर दी गई है। इसी बढ़ोतरी को लेकर ट्रांसपोर्ट यूनियन और वाहन मालिक विरोध कर रहे हैं।
पवन टेंपो ट्रांसपोर्ट के ऑनर ओमपाल सिंह ने कहा कि पहले से ही ट्रांसपोर्ट व्यवसाय कई मुश्किलों से गुजर रहा है। डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और अब ग्रीन टैक्स बढ़ने से गाड़ियों का संचालन और महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह टैक्स पहले से लागू था तो अचानक इसे बढ़ाने की जरूरत क्या थी। उनके मुताबिक वर्तमान सरकार ने इसमें बढ़ोतरी करके ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। ओमपाल सिंह का कहना है कि इसका असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर बाजार और आम आदमी तक पहुंच रहा है। ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा के सामानों के दाम भी बढ़ रहे हैं।
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ा है। पहले जहां ट्रांसपोर्टर कम लागत में माल पहुंचा देते थे, अब वही काम काफी महंगा हो चुका है। ओमपाल सिंह ने कहा कि गाड़ियों में डीजल भरवाकर माल भेजना अब पहले की तुलना में ज्यादा खर्चीला हो गया है। कई बार ग्राहक भी बढ़े हुए किराए देने से मना कर देते हैं, जिससे ट्रांसपोर्टरों को नुकसान उठाना पड़ता है।
नोएडा के सेक्टर-5 को ट्रांसपोर्ट हब माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट कंपनियां और गोदाम मौजूद हैं। ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि हड़ताल और टैक्स बढ़ोतरी की वजह से कारोबार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो हालात और खराब हो सकते हैं। ट्रकों के पहिए थमने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और इसका असर उद्योगों पर भी पड़ने लगा है।
Location : Noida
Published : 24 May 2026, 4:26 PM IST