गोरखपुर साइबर ठगों का बड़ा क्रैकडाउन, मर्चेंट QR कोड से चला रहे थे करोड़ों का नेटवर्क, 3 गिरफ्तार

कोतवाली पुलिस और साइबर कमांडो टीम ने फर्जी दस्तावेजों पर मर्चेंट क्यूआर कोड और साउंडपॉड बनाकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 1308 जी-पे साउंडपॉड और 866 क्यूआर स्कैनर समेत भारी मात्रा में गैजेट्स बरामद किए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 June 2026, 5:31 PM IST

Gorakhpur : गोरखपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मर्चेंट क्यूआर कोड बनाकर साइबर ठगी के करोड़ों रुपये के लेन-देन को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। कोतवाली पुलिस, साइबर कमांडो टीम और जनपदीय एंटी थेफ्ट टीम की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके कब्जे से 13 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, 1308 जी-पे साउंडपॉड और 866 क्यूआर स्कैनर बरामद किए गए हैं।

कुशीनगर और गोरखपुर के रहने वाले हैं आरोपी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में कुशीनगर निवासी संकेत राय, गोरखनाथ निवासी तौहीद आलम उर्फ गोलू तथा शाहपुर निवासी राज सिंह शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

फर्जी दस्तावेजों से डिजिटल पेमेंट कंपनियों में बनाते थे अकाउंट

जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी पैन कार्ड, वोटर आईडी और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर Google Pay, BharatPe, Mobikwik समेत विभिन्न डिजिटल भुगतान कंपनियों में मर्चेंट अकाउंट बनाते थे। इन खातों से जुड़े क्यूआर कोड और साउंडपॉड साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन और निकासी के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

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कई राज्यों से जुड़े हैं ठगी के तार

पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। प्रारंभिक जांच में इन बैंक खातों में करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड का लेन-देन होने की जानकारी सामने आई है। कई राज्यों और जनपदों में इन खातों से संबंधित ऑनलाइन साइबर शिकायतें भी दर्ज पाई गई हैं।

पुलिस कर रही आगे की कार्रवाई

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे साइबर अपराधियों के लिए लोगों को बहला-फुसलाकर "म्यूल बैंक खाते" खुलवाते थे। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन खातों को मर्चेंट अकाउंट में बदलकर उनसे क्यूआर कोड और साउंडपॉड जोड़ दिए जाते थे। लगातार अधिक लेन-देन दिखने के कारण ऐसे खाते साइबर शिकायत होने के बाद भी जल्दी फ्रीज नहीं होते थे, जिससे ठगी की रकम को आसानी से इधर-उधर किया जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों की गहन जांच की जा रही है। आशंका है कि इस गिरोह के तार कई राज्यों में सक्रिय बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

Location :  gorakhpur

Published :  10 June 2026, 5:31 PM IST