जनपद के मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित नगर पंचायत उनवल में नीलकंठ महराज का प्रसिद्ध शिवालय आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह स्थान सदियों से चमत्कारों और दिव्य कथाओं से जुड़ा रहा है। पढिए पूरी खबर

नीलकंठ महादेव मंदिर उनवल
गोरखपुर: जनपद के मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित नगर पंचायत उनवल में नीलकंठ महराज का प्रसिद्ध शिवालय आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह स्थान सदियों से चमत्कारों और दिव्य कथाओं से जुड़ा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लगभग 400 वर्ष पूर्व यहां घना जंगल हुआ करता था। उस समय बार-बार जोड़े सर्प (दो सांपों का जोड़ा) दिखाई देने से लोगों में उत्सुकता जागी। लोग इसे भगवान शिव का संकेत मानकर वहां पहुंचने लगे। इसी बीच कलकत्ता (कोलकाता) से आए नककसियो के हस्त कला से यहां भव्य शिवालय का निर्माण करवाया। तब से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बन गया।
भगवान शिव की हर मुराद पूरी होने की मान्यता
नीलकंठ महादेव मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान शिव की हर मुराद पूरी होने की मान्यता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों भक्त पहुंचते हैं। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के साथ लोग अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और कईयों का दावा है कि उनकी इच्छाएं अवश्य पूरी होती हैं। मंदिर परिसर में प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का अनोखा संगम है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र
हाल ही में नगर पंचायत उनवल के चेयरमैन प्रतिनिधि श्री मिंटू दुबे ने पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए छाया प्रदान करने की दिशा में सराहनीय पहल की। उन्होंने मंदिर परिसर में पांच पीपल, बरगद और बेल के वृक्ष रोपित किए। यह कार्य न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। पीपल और बरगद जैसे वृक्ष ऑक्सीजन देने वाले और छाया प्रदान करने वाले माने जाते हैं, जबकि बेल का पेड़ भगवान शिव को प्रिय है। इस रोपण से मंदिर का परिवेश और अधिक हराभरा हो गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
पूर्वांचल का एक प्रमुख तीर्थस्थल
यह पहल स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा पर्यावरण और आस्था को जोड़ने का बेहतरीन उदाहरण है। उमेश कुमार दुबे उर्फ़ मिंटू दुबे ने बताया कि जनजीवन में छाया और शुद्ध हवा उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है, और मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर यह कार्य और भी प्रभावी साबित होगा। नीलकंठ महादेव मंदिर न केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि यह सामाजिक एकता और पर्यावरण जागरूकता का भी प्रतीक बन रहा है। महाशिवरात्रि के मेले में लाखों की भीड़, चमत्कारी मान्यताएं और अब वृक्षारोपण जैसी पहल इसे पूर्वांचल का एक प्रमुख तीर्थस्थल बनाती हैं। जो भक्त यहां आते हैं, वे न केवल भगवान शिव के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी महसूस करते हैं।