Gorakhpur News: लोन के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खेल बेनकाब, 7 शातिर गिरफ्तार

गोरखपुर में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना एम्स पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। 24 मार्च 2026 को जारी प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस ने 7 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को लोन और सरकारी योजनाओं का लालच देकर उनके बैंक खातों…

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 24 March 2026, 4:52 PM IST

Gorakhpur:  गोरखपुर में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना एम्स पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। 24 मार्च 2026 को जारी प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस ने 7 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को लोन और सरकारी योजनाओं का लालच देकर उनके बैंक खातों का दुरुपयोग करते थे।

क्या है पूरी घटना?

गिरफ्तार अभियुक्तों में ध्रुव साहनी, सूरज सिंह, अजय उपाध्याय, अखंड प्रताप सिंह उर्फ विक्की, बृजेन्द्र कुमार सिंह, अभिषेक यादव और अमर निषाद शामिल हैं। ये सभी आरोपी मिलकर जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से 10 मोबाइल फोन, 1 टैब, 2 लैपटॉप, 8 फर्जी मोहरें, 28 साइन किए हुए चेक, 4 पासबुक, 3 एटीएम कार्ड और 2 चेकबुक बरामद की हैं।

 बैंक से लोन मिलने में दिक्कत 

जांच में सामने आया कि आरोपी पहले ऐसे लोगों को तलाशते थे जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी और जिन्हें बैंक से लोन मिलने में दिक्कत हो रही होती थी। फिर ये खुद को फाइनेंस एजेंट बताकर या सरकारी योजना का झांसा देकर उनका विश्वास जीत लेते थे। इसके बाद खाताधारकों से उनके बैंक खाते की पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और चेकबुक ले लेते थे।

खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए 

पीड़ितों को शुरुआत में कुछ हजार रुपये “सरकारी योजना का लाभ” बताकर दिए जाते थे, जिससे उनका भरोसा और मजबूत हो जाए। लेकिन असल में आरोपी उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए करते थे और करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन करते थे। खाताधारकों को इस गतिविधि की जानकारी तक नहीं होती थी।

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मामला तब उजागर हुआ जब एक पीड़ित के खाते में संदिग्ध लेन-देन के चलते शिकायत दर्ज हुई और उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया। जब पीड़ित ने आरोपियों से पूछताछ की, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी दस्तावेज और नकली स्टांप का इस्तेमाल कर लोन प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाते थे। जरूरत पड़ने पर वे खुद ही कूटरचित दस्तावेज तैयार कर देते थे।

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यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि आसान पैसे के लालच में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करना कितना खतरनाक हो सकता है।

 

Location : 
  • गोरखपुर

Published : 
  • 24 March 2026, 4:52 PM IST