
जानीपुर में बाघ की दहशत से रातभर पहरेदारी (Img: Dynamite News)
Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के जानीपुर और आसपास के गांवों में एक जंगली जानवर की मौजूदगी की खबर से लोगों में डर का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया पर जानवर का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई। बृहस्पतिवार की रात लोग अपने पालतू पशुओं की सुरक्षा के लिए लाठी-डंडे लेकर पहरा देते रहे। शुक्रवार सुबह वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाश शुरू की।
शुरुआती जांच में जानवर के बाघ होने के बजाय फिशिंग कैट यानी मछली पकड़ने वाली बिल्ली होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, उसकी पहचान की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गोला थाना क्षेत्र के जानीपुर और आसपास के इलाकों में जंगली जानवर देखे जाने की चर्चा के बाद ग्रामीण सतर्क हो गए। पश्चिम बलिया खखरी बलिया गांव के पास, सिधारी गांव के बाहरी हिस्से और भरवलिया टोले के आसपास जानवर दिखाई देने की बातें सामने आईं। कुछ युवकों ने तालाब के पास जानवर देखने का दावा किया। इसके बाद गांव में बाघ होने की आशंका फैल गई। ग्रामीणों को अपने मवेशियों की चिंता सताने लगी और कई लोग रातभर लाठी-डंडे लेकर पहरेदारी करते रहे।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो ने इस डर को और बढ़ा दिया। हालांकि, वीडियो में दिख रहे जानवर की पहचान को लेकर अभी कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है।
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सूचना मिलने पर शुक्रवार सुबह वन विभाग की टीम सिधारी गांव पहुंची। बड़हलगंज रेंज के क्षेत्राधिकारी शिवजीत सिंह और बांसगांव रेंज के अधिकारी आरके श्रीवास्तव के नेतृत्व में संभावित ठिकानों पर तलाश की गई। इस अभियान में डिप्टी रेंजर सुधीर कुमार के साथ रेस्क्यू टीम के मोहित कश्यप, जितेंद्र कुमार, मोती और सिद्धार्थ शामिल रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद थे।
टीम ने तालाब के किनारे और आसपास के इलाकों की बारीकी से जांच की। वहां मिले पैरों के निशानों को भी देखा गया। जांच के दौरान छोटे, बिल्ली जैसे पैरों के निशान मिलने की बात सामने आई। जानवर को बाहर निकालने के लिए पटाखे भी फोड़े गए, लेकिन दोपहर तक चले अभियान में वह दिखाई नहीं दिया।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस इलाके में बाघ की मौजूदगी की संभावना बेहद कम है। शुरुआती अनुमान है कि ग्रामीणों ने जिस जानवर को देखा, वह फिशिंग कैट हो सकता है। इसे हिंदी में मछली पकड़ने वाली बिल्ली कहा जाता है। बड़हलगंज रेंज के क्षेत्राधिकारी शिवजीत सिंह ने बताया कि सरयू नदी में बाढ़ आने पर कुछ जंगली जानवर आसपास के इलाकों में पहुंच सकते हैं। ऐसे में इस जानवर के भी बाढ़ के कारण यहां आने की आशंका जताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, तालाब के पास मछलियां फेंके जाने के कारण उनकी गंध से यह जानवर वहां पहुंचा हो सकता है।
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वन विभाग ने सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों को लेकर भी सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि AI से संवर्धित या बदली गई तस्वीरें लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकती हैं। इसलिए केवल वीडियो या तस्वीर देखकर किसी जानवर को बाघ मान लेना सही नहीं है।
ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सतर्क जरूर रहें। अगर कोई संदिग्ध जंगली जानवर दोबारा दिखाई देता है, तो उसके पास जाने, पीछा करने या उसे घेरने की कोशिश न करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
जानीपुर और आसपास के गांवों में बाघ होने की आशंका से फैली दहशत के बीच वन विभाग ने तलाश अभियान चलाकर स्थिति का जायजा लिया है। शुरुआती जांच में फिशिंग कैट होने की संभावना जताई गई है, लेकिन अभी तक बाघ होने या किसी अन्य जानवर की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Location : Gorakhpur
Published : 16 October 2026, 9:22 PM IST