
दहेज हत्या के दोषी पर कोर्ट सख्त
Gorakhpur: दहेज हत्या के एक सात साल पुराने मामले में प्रभावी पैरवी के चलते आखिरकार आरोपी को सजा मिल गई। गोरखपुर की अदालत ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त लक्ष्मन पासवान उर्फ लक्षिमन को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2017 में गगहा थाना क्षेत्र में दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इस संबंध में थाना गगहा पर मुकदमा अपराध संख्या 441/2017 के तहत धारा 304बी, 498ए भादवि और 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामले में लक्ष्मन पासवान उर्फ लक्षिमन पुत्र स्वर्गीय झाबर पासवान निवासी बाउपार, थाना गगहा को अभियुक्त बनाया गया था।
दहेज हत्या से जुड़े इस मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया। दोषी को भारतीय कानून के प्रावधानों के तहत कठोर कारावास की सजा दी गई। इसके अतिरिक्त आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
पुलिस की सतत निगरानी और मजबूत पैरवी के परिणामस्वरूप अपर सत्र न्यायाधीश (ASJ/UPSEB), जनपद गोरखपुर की अदालत ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से ADGC श्रद्धानंद पाण्डेय, ADGC रविन्द्र कुमार सिंह और ADGC शरदेन्दु प्रताप नारायण सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने तीनों सहायक जिला शासकीय अधिवक्ताओं के योगदान की सराहना की है।
दहेज हत्या के मामले समाज में लंबे समय से चिंता का विषय बने हुए हैं। शादी के बाद दहेज की मांग को लेकर महिलाओं को प्रताड़ित किए जाने और उनके साथ हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोष सिद्ध होने पर अदालत सजा सुनाती है।
लिस अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन कनविक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों में प्रभावी विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और न्यायालय में लगातार पैरवी के माध्यम से अपराधियों को सजा दिलाना है।
Location : Gorakhpur
Published : 4 November 2026, 10:41 PM IST
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