Farrukhabad News: जहां मुफ्त प्रसव की सुविधा, वहीं 1500 रुपये लेने का आरोप, शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं

फर्रुखाबाद के कमालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान स्टाफ नर्स पूजा पर 1500 रुपये लेने का आरोप लगा है। पीड़ित ज्ञानेंद्र का दावा है कि 15 दिनों से शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। जानिए पूरा मामला।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 November 2026, 12:30 PM IST

Farrukhabad: फर्रुखाबाद जिले का कमालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में आ गया है। यहां प्रसव कराने के नाम पर स्टाफ नर्स द्वारा 1500 रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।

पीड़ित ज्ञानेंद्र ने अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स पूजा पर यह रकम लेने का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत की है। मामला सामने आने के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

डिलीवरी कराने के नाम पर रुपये लेने का दावा

पीड़ित ज्ञानेंद्र का आरोप है कि जब वह प्रसव के सिलसिले में कमालगंज सीएचसी पहुंचे, तो वहां तैनात स्टाफ नर्स पूजा ने डिलीवरी कराने के नाम पर उनसे 1500 रुपये लिए। ज्ञानेंद्र का कहना है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उनसे पैसे लिए गए। उनका आरोप है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह रकम लेना मरीजों और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।

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15 दिनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा पीड़ित

ज्ञानेंद्र के मुताबिक, इस मामले में शिकायत करने के बाद से वह करीब 15 दिनों से अस्पताल और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक उनकी शिकायत पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है।

पीड़ित ज्ञानेंद्र (Img- Dynamite News)

पीड़ित ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने और संबंधित स्टाफ के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, शिकायत पर विभाग की ओर से क्या कदम उठाया गया है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

सरकारी अस्पताल में वसूली के आरोप से उठे सवाल

इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव जैसी जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीजों और उनके परिजनों को निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है।

ऐसे में यदि किसी कर्मचारी पर पैसे लेने का आरोप लगता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित रकम किस आधार पर ली गई और क्या इसके लिए कोई आधिकारिक रसीद दी गई थी।

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जांच और कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल ज्ञानेंद्र ने अपनी शिकायत के आधार पर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। स्टाफ नर्स पूजा पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।

अब देखना होगा कि विभाग शिकायत की जांच कराकर आरोपों की सच्चाई सामने लाता है या नहीं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसव के दौरान 1500 रुपये लेने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

Location :  Farrukhabad

Published :  5 November 2026, 12:30 PM IST