किसानों का कहना है कि क्रय-विक्रय पर लगाए गए प्रतिबंध से उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है। जमीन न तो बेची जा सकती है और न ही उस पर निर्माण या अन्य उपयोग संभव है, जिससे किसान आर्थिक और मानसिक संकट में हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूमि अर्जन के दौरान सभी खसरा नंबरों को शून्य दिखाया गया है, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

गोरखपुर प्राधिकरण पर किसानों का हल्ला बोल
Gorakhpur: सहजनवां तहसील क्षेत्र के रावतपार सरया गांव के दर्जनों किसानों ने गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मंगलवार को गीडा कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। किसान सुनील यादव के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने चार सूत्रीय मांगों को लेकर विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी, गीडा को ज्ञापन सौंपते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरी तरह जनविरोधी बताया।
क्या है मामला?
प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि गांव के 117/330 कृषि एवं आवासीय भूखंडों को विकास के नाम पर अधिसूचित कर दिया गया है, जबकि इस संबंध में न तो किसानों की सहमति ली गई और न ही उन्हें विश्वास में लिया गया। किसानों ने कहा कि वे पहले ही गजट संबंधी सूचना को मानने से इनकार कर चुके हैं और शपथ पत्र देने से भी स्पष्ट रूप से मना कर दिया है। इसके बावजूद जबरन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
किसानों ने कहा- मौलिक अधिकारों का हनन
किसानों का कहना है कि क्रय-विक्रय पर लगाए गए प्रतिबंध से उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है। जमीन न तो बेची जा सकती है और न ही उस पर निर्माण या अन्य उपयोग संभव है, जिससे किसान आर्थिक और मानसिक संकट में हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूमि अर्जन के दौरान सभी खसरा नंबरों को शून्य दिखाया गया है, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
किसानों के साथ जबरदस्ती क्यों?
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि किसानों की सहमति के बिना भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। किसानों ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री की मंशा स्पष्ट है तो फिर गीडा प्रशासन किसानों पर जबरदस्ती क्यों कर रहा है।
क्या है किसानों की मांग?
किसानों की प्रमुख मांगों में अधिसूचना को तत्काल निरस्त करना, क्रय-विक्रय पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाना, भूमि अर्जन की प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करना, आवासी और व्यावसायिक निर्माण के लिए नक्शा पास करने की अनुमति देना शामिल है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस मौके पर रामनगीना साहनी, उमेश यादव, पंकज सिंह, रामनयन सिंह, सुरेंद्र सिंह, हरिराम यादव, देवेंद्र गुप्ता और चंद्रभान सिंह सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन किसानों के तेवर साफ तौर पर प्रशासन के प्रति नाराजगी दर्शा रहे थे।