
श्रीराम कथा महायज्ञ में आचार्य शशिकांत रामायणी
Etawah: जसवंतनगर क्षेत्र के ग्राम नगला रामसुंदर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ के अष्टम दिवस पर भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में जैसे ही सती अनुसुइया के तप और सूपनखा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन शुरू हुआ, पूरा वातावरण श्रद्धा और भावनाओं से सराबोर हो गया। श्रद्धालु कथा के हर शब्द में डूबते चले गए और कई स्थानों पर माहौल भावुकता से भर गया।
कथावाचक आचार्य शशिकांत रामायणी ने रामायण और पुराणों के प्रसंगों को अत्यंत सरल और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन के दौरान घटित सती अनुसुइया और सूपनखा प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा सुनते समय पंडाल में मौजूद भक्तों ने कई बार भाव-विभोर होकर हाथ जोड़ लिए और वातावरण पूरी तरह धार्मिक ऊर्जा से भर गया।
रामकथा में सूपनखा प्रसंग सुन झूमे श्रद्धालु
आचार्य शशिकांत रामायणी ने बताया कि जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे तो वहां सती अनुसुइया ने माता सीता को पतिव्रत धर्म, त्याग और नारी शक्ति का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सती अनुसुइया का तप इतना महान था कि देवता भी उनके समक्ष नतमस्तक हो जाते थे। माता अनुसुइया ने माता सीता को दिव्य वस्त्र और आभूषण प्रदान कर उन्हें आदर्श गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद दिया।\
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कथा के दौरान आचार्य ने सूपनखा प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार, वासना और अधर्म का अंत निश्चित होता है और यह प्रसंग उसी का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि सूपनखा ने भगवान श्रीराम को मोहित करने का प्रयास किया, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने धर्म और मर्यादा का पालन करते हुए उसे उचित मार्ग दिखाया। इसके बाद लक्ष्मण द्वारा सूपनखा की नाक काटे जाने की घटना को उन्होंने अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया।
नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ में परीक्षित की भूमिका ठाकुर चंद्रवीर सिंह तोमर और राजेश्वरी देवी निभा रहे हैं। कथा स्थल पर रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
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आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। भक्तों के लिए बैठने, जलपान और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि किसी को असुविधा न हो।
इस अवसर पर विश्वनाथ तोमर, राजनरेश सिंह, मनोज तोमर, ब्रज बिहारी सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।
Location : Etawah
Published : 24 May 2026, 9:22 PM IST