किस दिव्य शक्ति से पता चला आरोपी वही है?…हाईकोर्ट ने बांदा पुलिस से पूछा तीखा सवाल

बांदा में कथित फर्जी मुठभेड़ मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिसंडा थाना प्रभारी को तलब करते हुए पूछा कि अज्ञात आरोपी वाली एफआईआर में पुलिस ने किस आधार पर याची को आरोपी मान लिया। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 May 2026, 4:00 PM IST

Banda: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा के चर्चित मुठभेड़ मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने बिसंडा थाना प्रभारी को तलब करते हुए पूछा कि आखिर पुलिस किस “दिव्य शक्ति” से इस नतीजे पर पहुंची कि अज्ञात के खिलाफ दर्ज लूट की एफआईआर में आरोपी आदेश पांडेय ही है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

गिरफ्तारी पर रोक के बाद हुई मुठभेड़

मामला बांदा जिले के बिसंडा थाना क्षेत्र का है। याची आदेश पांडेय ने अपने खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट की एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे विचारणीय माना और सरकार से जवाबी हलफनामा तलब करते हुए याची की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसी बीच 9 मई की रात पुलिस ने दावा किया कि आदेश पांडेय को लूट के एक मामले में मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया। हालांकि याची का आरोप है कि पुलिस ने उसे पहले जबरन उठाया और बाद में गोली मारकर एनकाउंटर की कहानी तैयार कर दी।

मेडिकल रिपोर्ट में मिले गोली लगने के निशान

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कथित मुठभेड़ की जांच Vineet Kumar की मेडिकल रिपोर्ट और जिला जज की जांच रिपोर्ट के आधार पर कराई। कोर्ट के सामने पेश रिपोर्ट में सामने आया कि याची के बाएं पैर की पिंडली पर गोली लगने के एंट्री और एग्जिट दोनों निशान मौजूद हैं। इसके बाद कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता से पूछा कि जब लूट की एफआईआर में किसी का नाम नहीं था तो पुलिस आखिर किस आधार पर आदेश पांडेय तक पहुंची।

हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछे सख्त सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या गिरफ्तारी से पहले आरोपी की शिनाख्त परेड कराई गई थी? अगर एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज थी तो पुलिस ने किस “दिव्य शक्ति” से यह तय कर लिया कि आरोपी आदेश पांडेय ही है। खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति J.J. Munir और न्यायमूर्ति Tarun Saxena ने सरकार को तीन दिन के भीतर हलफनामा दाखिल कर इन सवालों का जवाब देने का आदेश दिया है।

19 मई को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने याची को यह भी छूट दी है कि वह लूट के मामले में जमानत याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत ने साफ कहा कि इससे उसके फर्जी मुठभेड़ के दावे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

Location :  Banda

Published :  15 May 2026, 4:00 PM IST