बदायूं में इंसानियत की मिसाल! PET अभ्यर्थियों को मुफ्त छत और नाश्ता दे सद्भावना मंच ने जीता दिल

परीक्षा देने अनजान शहर पहुंचे 100 अभ्यर्थियों की मदद के लिए रात में कौन पहुंचा रेलवे स्टेशन? सद्भावना मंच के सदस्यों ने ठहरने से लेकर नाश्ते तक की जिम्मेदारी उठाकर पेश की इंसानियत की मिसाल।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 30 October 2026, 3:42 PM IST
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Budaun: PET परीक्षा 2026 में शामिल होने के लिए दूसरे जिलों और दूरदराज के इलाकों से बदायूं पहुंचे अभ्यर्थियों की मदद के लिए सद्भावना मंच बदायूं ने सराहनीय पहल की। मंच की ओर से करीब 100 परीक्षार्थियों के लिए निःशुल्क ठहरने और सुबह के नाश्ते की व्यवस्था की गई। इस पहल का उद्देश्य अभ्यर्थियों को अनजान शहर में होने वाली परेशानियों से बचाना और उन्हें बिना किसी तनाव के परीक्षा में शामिल होने में मदद करना था।

रात में ही रेलवे स्टेशन पहुंच गए मंच के सदस्य

परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सद्भावना मंच के सदस्य रात में ही बदायूं रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां उन्होंने दूसरे शहरों से आए अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी ली। जिन परीक्षार्थियों को ठहरने या अन्य जरूरी सुविधाओं की आवश्यकता थी, उनके लिए मौके पर ही इंतजाम किया गया।

100 अभ्यर्थियों की मदद (IMG: Dynamite News)

परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में भी की मदद

सिर्फ ठहरने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सुबह परीक्षार्थियों के लिए नाश्ते का भी इंतजाम किया गया। इसके साथ ही उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए जरूरी मार्गदर्शन दिया गया, ताकि किसी अभ्यर्थी को परीक्षा देने में परेशानी न हो। परीक्षा संपन्न होने के बाद मंच के सदस्यों ने सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देकर विदा किया।

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परीक्षार्थियों ने जताया सद्भावना मंच का आभार

सद्भावना मंच की इस पहल से परीक्षार्थी काफी खुश नजर आए। दूरदराज से आए अभ्यर्थियों ने कहा कि अनजान शहर में रात के समय रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर मदद करना और उनके रहने से लेकर नाश्ते तक की व्यवस्था करना बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने मंच के सदस्यों का आभार जताते हुए इस सहयोग को यादगार अनुभव बताया।

विद्यार्थी देश का भविष्य

डॉ. इत्तेहाद आलम ने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। दूसरे शहरों से परीक्षा देने आए बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो, यही मंच का उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि सद्भावना मंच आगे भी शिक्षा और जनसेवा से जुड़े कार्यों में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

वहीं, मुहम्मद शादाब ने बताया कि जब उन्हें जानकारी मिली कि दूरदराज से परीक्षार्थी बदायूं पहुंच रहे हैं और उन्हें ठहरने में परेशानी हो सकती है, तो मंच के सदस्यों ने रात में ही रेलवे स्टेशन पहुंचकर उनकी मदद करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की खुशी और उनकी दुआएं ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान हैं।

पेश की इंसानियत की मिसाल (IMG: Dynamite News)

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समाजसेवा का मतलब जरूरत के समय मदद करना

सरफराज अब्बासी ने कहा कि समाजसेवा का असली अर्थ जरूरत के समय किसी के काम आना है। रात में स्टेशन पहुंचकर परीक्षार्थियों की परेशानियां दूर करने, उनके ठहरने और सुबह के नाश्ते की व्यवस्था करना मंच की एक छोटी-सी कोशिश थी। उन्होंने कहा कि खुशी है कि करीब 100 परीक्षार्थियों को इस पहल का लाभ मिला। बदायूं आने वाला कोई भी विद्यार्थी खुद को अकेला महसूस न करे, यही मंच का संकल्प है।

अशर खान ने भी इस पहल को आपसी सहयोग, भाईचारे और इंसानियत की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं और परीक्षार्थियों की मदद करना समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। मंच आगे भी इस तरह के जनसेवा के कार्य जारी रखेगा।

कई सदस्यों ने निभाई अहम भूमिका

इस पहल को सफल बनाने में डॉ. इत्तेहाद आलम, मुहम्मद शादाब, सरफराज अब्बासी, डॉ. साबीह खान, अशर खान, सुबोध यादव, सौरभ सक्सेना, मास्टर महताब और मुहम्मद जुवेर समेत अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

अंत में सद्भावना मंच के सदस्यों ने सभी परीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और सफलता की कामना की। मंच की ओर से कहा गया कि समाज में सद्भाव, भाईचारे और जरूरतमंदों की सहायता का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

Location :  Budaun

Published :  30 October 2026, 3:42 PM IST

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