बाढ़ का पानी उतरा, लेकिन किसानों की उम्मीदें डूब गईं: 58 बीघा परवल बर्बाद, चार दिन से प्यासे हजारों लोग

घाघरा नदी का पानी थोड़ा घटा, लेकिन सगड़ी के बाढ़ प्रभावित गांवों में संकट बरकरार है। सहबदिया में 58 बीघे की परवल फसल डूबने से किसानों को 50 लाख रुपये से ज्यादा नुकसान का दावा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 August 2026, 2:58 PM IST

Basti: घाघरा नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट जरूर दर्ज हुई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की परेशानी अभी कम नहीं हुई है। कहीं खेतों में खड़ी फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई, तो कहीं घरों तक पहुंचने के रास्ते बंद हैं। सबसे बड़ी मार सहबदिया गांव के उन किसानों पर पड़ी है, जिन्होंने परवल की खेती पर इस बार बड़ी उम्मीद लगा रखी थी।

58 बीघे की फसल पानी में समाई

हरैया विकास खंड के सहबदिया गांव में करीब दो दर्जन किसानों की 58 बीघे में लगी परवल की फसल बाढ़ की चपेट में आकर बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें 50 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। किसानों ने एक से चार बीघे तक में परवल लगाया था। एक बीघा फसल तैयार करने में करीब 50 हजार रुपये खर्च होते हैं। फसल तैयार होने के बाद एक बीघे से एक लाख रुपये से अधिक कमाई की उम्मीद थी। अच्छी पैदावार की संभावना के बीच अचानक खेतों में भर आए पानी ने किसानों की मेहनत और पूरी लागत दोनों पर पानी फेर दिया।

किसानों के मुताबिक परवल के पौधे गाजीपुर के कासिमाबाद क्षेत्र से लाकर लगाए जाते हैं। इसके बाद खाद, पानी और देखभाल पर लगातार खर्च करना पड़ता है। अब हालात ऐसे हैं कि कई किसान खेती में लगी रकम वापस मिलने को लेकर भी चिंतित हैं।

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पानी घटा, खतरा अभी टला नहीं

घाघरा नदी का जलस्तर 24 घंटे में सात सेंटीमीटर कम हुआ है। बदरहुआ नाले पर जलस्तर शुक्रवार शाम 72.01 मीटर से घटकर शनिवार को 71.94 मीटर हो गया। डिघिया नाले पर भी तीन सेंटीमीटर की कमी दर्ज हुई और जलस्तर 71.25 मीटर पहुंच गया। हालांकि राहत की बात अभी पूरी नहीं है। दोनों जगह पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। डिघिया में खतरे का निशान 70.40 मीटर और बदरहुआ में 71.68 मीटर है। ऐसे में ग्रामीणों की नजर लगातार नदी और नालों के जलस्तर पर बनी हुई है।

बच्चे पानी में चलकर जा रहे स्कूल

बाढ़ ने गांवों के बीच संपर्क भी मुश्किल कर दिया है। सोनौरा में अब तक नाव की व्यवस्था नहीं हो सकी है। सड़क पर कमर तक पानी भरा होने के कारण सैकड़ों बच्चे पानी से होकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। कुढ़ई के ग्रामीण नाव के सहारे आवाजाही कर रहे हैं, जबकि चिकनहवा ढाला के उत्तर बसे गांवों के लोगों को करीब दो किलोमीटर तक पानी में चलना पड़ रहा है।

अराजी मलहपुरवा, गंगा पुरैनिया, महाजी जमुनिहवा, शंकरपुर, जजमन जोत, रसूलपुर और आराजी प्रकाश समेत कई गांवों में संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। जरूरी काम के लिए निकलना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।

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चार दिन से पांच हजार लोगों को नहीं मिला साफ पानी

देवारा क्षेत्र के हाजीपुर में बाढ़ का असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। जल जीवन मिशन की पानी की टंकी और ट्यूबवेल परिसर में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। इसके कारण करीब पांच हजार की आबादी को चार दिनों से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों को मजबूरी में दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। बाढ़ के बीच यह परेशानी उनके लिए एक और बड़ी मुसीबत बन गई है।

किसानों को सर्वे की उम्मीद

ग्रामीणों ने सोनौरा में तत्काल नाव उपलब्ध कराने और बर्बाद फसल का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है। तहसीलदार सगड़ी नवीन निश्चल त्रिपाठी ने कहा कि परवल की फसल के नुकसान का सर्वे कराया जाएगा और किसानों की क्षति की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। फिलहाल नदी का पानी थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन गांवों में हालात सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है। किसानों की बर्बाद फसल, बंद रास्ते और पेयजल संकट बता रहे हैं कि पानी घटने के बावजूद बाढ़ की परेशानी अभी बाकी है।

Location :  Basti

Published :  23 August 2026, 2:58 PM IST