यूपी- नेपाल बॉर्डर पर दोनों देशों की नागरिकता का खेल, 27 लोग दोनों देशों के निकले नागरिक, जाने कैसे फूटा भांडा

भारतीय पहचान का नेपाल कनेक्शन सामने आया है। 27 नेपाली नगारिकों पर एफआईआर दर्ज की गई है। दोहरी मतदाता सूची से मामले का खुलासा हुआ।अब आगे की जांच में लगी आखिर कैसे हुई यह जालसाजी, पढ़ें पूरी खबर में..

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 8:38 PM IST

Balrampur: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन ने नेपाल के 27 नागरिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। आरोप है कि इन लोगों ने नेपाल की नागरिकता और वहां की मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद भारत में भी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज बनवा लिए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की भी आशंका जताई जा रही है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर

पूरा मामला जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त सूची के आधार पर सामने आया। इसके बाद थाना जरवा पुलिस ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच में सामने आया कि सूची में शामिल अधिकांश लोगों का मूल निवास नेपाल के डांग जिले के कोईलाबास क्षेत्र में है, जबकि भारत में उन्होंने बलरामपुर जिले के बालापुर (अनवरडीह), शीतलापुर, रिजवान गली और नई बाजार जैसे पते दर्ज कर भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए।

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भारत और नेपाल, दोनों देशों की मतदाता सूची में नाम

प्रारंभिक जांच में कई लोगों के नाम भारत और नेपाल दोनों देशों की मतदाता सूचियों में दर्ज पाए गए। पुलिस का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य सरकारी पहचान पत्र बनवाए गए। अब यह जांच की जा रही है कि ये दस्तावेज किन अभिलेखों और किस प्रक्रिया के तहत जारी हुए।

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की भी आशंका

जांच एजेंसियों को संदेह है कि भारतीय पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर सरकारी योजनाओं का लाभ भी लिया गया। अब संबंधित विभागों से रिकॉर्ड मंगाकर दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।

सत्यापन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

दस्तावेजों की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए। एक आरोपी अब्दुल रहमान के बारे में पता चला कि जिस भारतीय पते पर उसका निवास दर्ज है, वहां वह कभी रहा ही नहीं। वहीं, अब्दुल अजीज सिद्दीकी की कुछ महीने पहले मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनका नाम अब भी संबंधित अभिलेखों में दर्ज मिला। इन खुलासों के बाद जांच और गहन कर दी गई है।

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इन 27 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट

एफआईआर में अब्दुल कादिर सिद्दीकी, सलीम सिद्दीकी, अब्दुल अजीज सिद्दीकी, अब्दुल अलीम सिद्दीकी, अब्दुल वहीद सिद्दीकी, अब्दुल करीम सिद्दीकी, अब्दुल रहीम, जकरुन्निशा, जाहिर खातून, हलिमा खातून, रेशमा, कमाल अहमद, जमीला, शाहिद अख्तर, सनाउल्ला सिद्दीकी, निशरत नूरसबा, यासिर अराफात, ओसामा, मोहम्मद अनस सिद्दीकी, फातिमा सिद्दीकी समेत कुल 27 लोगों को नामजद किया गया है।

स्थानीय नेटवर्क की भी होगी जांच

पुलिस अब यह भी पता लगाएगी कि भारतीय पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किसी स्थानीय व्यक्ति, सत्यापन अधिकारी या सरकारी कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही। यदि जांच में किसी की मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व सांसद के मोहल्ले का पता इस्तेमाल करने का दावा

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई आरोपियों ने अपने भारतीय पते के रूप में तुलसीपुर के शीतलपुरम वार्ड स्थित उस इलाके का पता दर्ज कराया, जहां पूर्व सांसद रिजवान जहीर का आवास है। उसी क्षेत्र को स्थानीय स्तर पर 'रिजवान गली' के नाम से भी जाना जाता है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

सीमा सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन पर उठे सवाल

भारत-नेपाल की खुली सीमा के कारण पहचान संबंधी दस्तावेज हमेशा संवेदनशील विषय रहे हैं। इस मामले ने एक बार फिर दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया और सीमा क्षेत्रों में पहचान संबंधी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

Location :  Balrampur

Published :  4 July 2026, 8:38 PM IST