22 सितंबर को सीज हुआ टेंपो, कोर्ट के कागजों में नहीं मिली सीज करने की धारा; जांच की मांग

बदायूं में टेंपो चालक ने ट्रैफिक इंस्पेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चालक का दावा है कि 24 दिन से वाहन पुलिस कस्टडी में है, जबकि कोर्ट के दस्तावेजों में सीज करने की धारा दर्ज नहीं है।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 14 October 2026, 6:53 PM IST
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Badaun: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक टेंपो चालक का आरोप है कि उसका वाहन 22 सितंबर 2026 से पुलिस कस्टडी में खड़ा है, लेकिन उसे छुड़ाने के लिए लगातार ट्रैफिक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। चालक का दावा है कि कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों में वाहन सीज करने की स्पष्ट धारा दर्ज नहीं है, जबकि टेंपो अब तक उसे वापस नहीं मिला है। इस मामले में ट्रैफिक इंस्पेक्टर मनोज कुमार वर्मा पर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है।

22 सितंबर को हुई थी टेंपो पर कार्रवाई

मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के पुलिस लाइन चौराहे का बताया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक, UP-24-AT5235 नंबर के टेंपो पर 22 सितंबर 2026 को ट्रैफिक इंस्पेक्टर मनोज कुमार वर्मा की आईडी से कार्रवाई की गई थी। चालक का कहना है कि इसके बाद से उसका वाहन पुलिस कस्टडी में खड़ा है।

चालक के मुताबिक, वह वाहन छुड़ाने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसे टेंपो नहीं मिल पाया है। इससे उसके सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा होने का दावा किया जा रहा है।

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कोर्ट में सीज करने की धारा नहीं होने का दावा

टेंपो चालक का कहना है कि जब वह वाहन रिलीज कराने के लिए कोर्ट पहुंचा तो उसे बताया गया कि वाहन पर जुर्माने की कार्रवाई दर्ज है, लेकिन सीज करने की कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। चालक का सवाल है कि यदि वाहन को विधिवत सीज नहीं किया गया, तो उसे इतने दिनों से पुलिस कस्टडी में क्यों रखा गया है?

चालक के वकील ने इस संबंध में नोटिस भेजकर वाहन को सीज करने का कानूनी आधार स्पष्ट करने की मांग की है। चालक का आरोप है कि नोटिस का अब तक जवाब नहीं मिला है। हालांकि, नोटिस की प्राप्ति, उसकी विषयवस्तु और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

ट्रैफिक इंस्पेक्टर पर महीनादारी मांगने का आरोप

चालक ने आरोप लगाया है कि जब वह टेंपो छुड़ाने के लिए ट्रैफिक इंस्पेक्टर के कार्यालय पहुंचा, तो उससे कथित तौर पर कहा गया कि यदि उसे टेंपो चलाना है तो महीनादारी देनी पड़ेगी। यह आरोप चालक की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

चालक का कहना है कि वह नियमानुसार बनने वाला जुर्माना भरने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बावजूद उसका वाहन वापस नहीं किया जा रहा है। उसका सवाल है कि जब दस्तावेजों में केवल जुर्माने की कार्रवाई दिखाई जा रही है, तो वाहन को रोके रखने का आधार क्या है?

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यातायात विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

मामले में मुख्य सवाल यह है कि वाहन को पुलिस कस्टडी में रखने का कानूनी आधार क्या है और क्या कार्रवाई से जुड़े सभी दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं। यदि चालान, वाहन जब्ती और उसे रिलीज करने की प्रक्रिया में कोई विसंगति है, तो उसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

वहीं, ट्रैफिक इंस्पेक्टर मनोज कुमार वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभागीय रिकॉर्ड, संबंधित अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है।

एसपी सिटी ने दिया जांच का आश्वासन

इस मामले पर एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला है, तो इसकी जानकारी लेकर पूरे प्रकरण में कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि यातायात विभाग वाहन को पुलिस कस्टडी में रखने के आधार और चालक की शिकायत पर क्या स्पष्टीकरण देता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि टेंपो को रिलीज करने में देरी की वजह क्या है और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Location :  badaun

Published :  14 October 2026, 6:53 PM IST

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