भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा एक्शन: दोहरी नागरिकता के शक में 27 लोग रडार पर, संपत्तियों की भी होगी जांच

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े दोहरी नागरिकता के मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। जरवा क्षेत्र के करीब 27 नेपाली मूल के लोग जांच के दायरे में हैं। अब सिर्फ नागरिकता ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीदी गई जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के साथ-साथ पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होगी।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 28 July 2026, 3:52 PM IST

Balrampur: भारत-नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में दोहरी नागरिकता और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान हासिल करने के कथित मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जरवा क्षेत्र के करीब 27 नेपाली मूल के लोग अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के बाद अब कार्रवाई का दायरा सिर्फ नागरिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है, जो कथित तौर पर भारतीय दस्तावेजों के आधार पर खरीदी गईं। प्रशासन का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी नहीं बल्कि सीमावर्ती सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी हो सकता है।

जमीन, मकान और दस्तावेजों की हो रही गहन जांच

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध लोगों ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद बलरामपुर और आसपास के क्षेत्रों में कितनी कृषि भूमि, मकान या व्यावसायिक संपत्तियां खरीदीं। इसके लिए दशकों पुराने राजस्व रिकॉर्ड, खतौनियां, रजिस्ट्री दस्तावेज, राशन कार्ड और मतदाता सूची का नए सिरे से मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य पूरी टाइमलाइन तैयार करना है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित फर्जी दस्तावेज कब बनाए गए, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में कैसे दर्ज कराया गया और उनके आधार पर किस समय कौन-कौन सी संपत्तियां अर्जित की गईं।

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सिर्फ संदिग्ध नहीं, पूरा नेटवर्क जांच के घेरे में

जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियां अब उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं जिन्होंने किसी भी स्तर पर कथित रूप से इस प्रक्रिया में सहयोग किया। इसमें दस्तावेजों का सत्यापन करने वाले अधिकारी, परिचयकर्ता और अन्य सहयोगी भी जांच के दायरे में हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या व्यक्ति की भूमिका फर्जी दस्तावेजों को वैध बनाने में सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। राजस्व और पुलिस विभाग पुराने अभिलेखों में मिली हर विसंगति को कानूनी साक्ष्य के रूप में दर्ज कर रहे हैं।

एसपी बोले- सीमा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

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बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने साफ कहा है कि भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पहचान पत्र हासिल करना और फिर उसके जरिए संपत्तियां अर्जित करना कानूनन गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल नागरिकता का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जा रही है।

Location :  Balrampur

Published :  28 July 2026, 3:52 PM IST