
राम मंदिर (Image Source: Pinterest)
Ayodhya: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर चल रहे विवाद ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल यानी SIT की शुरुआती जांच में चढ़ावे की गणना और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कई लोगों पर एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक जांच टीम को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की आशंका मजबूत हुई है। मामले में ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों, निर्माण व्यवस्था से जुड़े लोगों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
मामले की जांच के लिए 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इसके बाद 15 जून को टीम अयोध्या पहुंची और लगातार छह दिन तक अलग-अलग लोगों से पूछताछ की। SIT में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल थे। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों और मामले से जुड़े संदिग्ध लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान करीब 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए। सूत्रों के अनुसार, करीब 30 लोगों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है।
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जांच के दौरान टिन्नू यादव से लगातार तीन दिन पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि पूछताछ में टिन्नू ने चढ़ावे की गणना और राशि जमा कराने की व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों के नाम बताए। सूत्रों के मुताबिक टिन्नू के अलावा अन्य गवाहों ने भी कुछ नामों का जिक्र किया है। जांच टीम अब इन बयानों और मिले दस्तावेजों का मिलान कर रही है। जांच में ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। दोनों के खिलाफ कई गवाहों के बयान और कुछ साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।
SIT की जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिनके आधार पर मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। जांच टीम अयोध्या से शनिवार को लखनऊ लौट आई है। संभावना है कि SIT सोमवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप सकती है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।
सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। कुछ संदिग्धों द्वारा इस संबंध में स्वीकारोक्ति किए जाने की बात भी कही जा रही है। SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच का फोकस सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने पर भी है।
इस विवाद के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी मंदिर प्रबंधन को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर की व्यवस्था बहुत बड़े स्तर पर चल रही है। यहां करीब 1500 लोग अलग-अलग तरीके से काम कर रहे हैं और यह किसी छोटी व्यवस्था की तरह नहीं बल्कि एक मिनी सिटी जैसा है। उन्होंने कहा कि मंदिर का पूरा प्रबंधन अनुभवी लोगों के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने व्यवस्था में स्पष्ट जिम्मेदारी, नियम और काम के बंटवारे की जरूरत बताई। नृपेंद्र मिश्र का कहना है कि प्रबंधन को मजबूत करने के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार करना जरूरी है, जिससे किसी भी तरह की समस्या को रोका जा सके।
Location : Ayodhya
Published : 21 June 2026, 8:31 AM IST