महराजगंज की अदालत ने वजीर आलम के विदेश जाने पर लगाई थी रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पलटा आदेश, जानिये पूरा मामला

महराजगंज के एक बेहद चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाते हुए नया आदेश जारी किया है। इस विवाद के कानूनी पहलुओं और कोर्ट की तल्ख टिप्पणी ने हर किसी को हैरान कर दिया है। आखिर क्या था यह पूरा मामला और कोर्ट ने क्यों हस्तक्षेप किया?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 11 July 2026, 1:45 PM IST

Maharajganj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दो अलग-अलग मामलों में बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले सुनाए हैं। अदालत ने जहां एक ओर आपराधिक मामले में जमानत पर बाहर चल रहे व्यक्ति के विदेश जाने के अधिकार को मौलिक अधिकार मानते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया, वहीं दूसरी ओर एक अन्य संवेदनशील पारिवारिक मामले में पांच वर्षीय मासूम बच्ची का मानसिक भविष्य संवारने के लिए उसकी कस्टडी मां से छीनकर अस्थायी रूप से पिता को सौंप दी है।

जमानत पर बाहर व्यक्ति को विदेश जाने से रोकना गलत

मौलिक अधिकार बनाम अदालती बंदिशें

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह की पीठ ने महराजगंज के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें एक आरोपी को विदेश यात्रा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से मना कर दिया गया था। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक के लिए विदेश यात्रा का अधिकार उसके मौलिक अधिकारों का हिस्सा है और इसे बिना किसी ठोस या वैध कारण के छीना नहीं जा सकता।

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क्या था महराजगंज का यह मामला?

यह पूरा मामला साल 2021 में महराजगंज जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे से जुड़ा है। याचिकाकर्ता वजीर आलम पर आईपीसी की धारा 323, 504, 325 और 308 के तहत मुकदमा चल रहा है। वजीर आलम के वकील ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि याचिकाकर्ता पर अपने बुजुर्ग माता-पिता और दो नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की भारी जिम्मेदारी है, जिसके लिए वह विदेश जाकर रोजगार कमाना चाहता है। कोर्ट को यह आश्वासन भी दिया गया कि मुकदमे की बाकी पैरवी उसके परिवार के अन्य सह-अभियुक्त सदस्य करेंगे और याचिकाकर्ता जरूरत पड़ने पर अदालत में उपस्थित होने के वचन से बंधा रहेगा।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और निर्देश

न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह ने ऐतिहासिक 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ' मामले का हवाला देते हुए कहा कि विशेष अदालत ने एनओसी खारिज करते वक्त न तो कोई ठोस वजह बताई और न ही केंद्र सरकार की 25 अगस्त 1993 की अधिसूचना पर ध्यान दिया। कोर्ट ने पाया कि आरोपी पहले कभी दोषी नहीं ठहराया गया है और उसके खिलाफ दर्ज धाराओं में अधिकतम सजा 7 साल से कम है, जिससे यह अपराध जघन्य श्रेणी में नहीं आता। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को 10 दिन के भीतर नया आवेदन देने को कहा है, जिस पर निचली अदालत को स्थापित सिद्धांतों के तहत 15 दिनों में फैसला लेना होगा।

मां की कस्टडी से निकालकर पिता को सौंपी गई 5 साल की मासूम

बच्ची को मोहरा बनाने पर हाईकोर्ट सख्त

एक अन्य बेहद भावुक और संवेदनशील मामले में हाईकोर्ट ने मां की कस्टडी से पांच साल की बच्ची को लेकर अस्थायी तौर पर उसके पिता को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने पिता की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता पिता का आरोप था कि उसकी पत्नी चांदनी जायसवाल ने बेटी को अपनी अवैध कस्टडी में रखा हुआ है और उसे पिता के खिलाफ भड़काया जा रहा है।

वीडियो कॉलिंग का अधिकार हुआ था बेअसर

इससे पहले साल 2025 में भी अदालत ने पिता को हर रविवार वीडियो कॉल के जरिए बेटी से बात करने का अधिकार दिया था, लेकिन मां और उसके परिवार द्वारा इसमें लगातार बाधाएं खड़ी की गईं। पिता के वकील ने दलील दी कि बच्ची को उसकी उम्र से परे बेहद आपत्तिजनक बातें सिखाई जा रही हैं, जो उसके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद खतरनाक हैं। हालांकि, मां के वकील ने इन सभी आरोपों को झूठा बताते हुए वैवाहिक विवाद का हवाला दिया और बच्ची की कम उम्र के कारण कस्टडी मां के पास ही रखने की मांग की।

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अदालत कक्ष में खुली पोल, 17 अगस्त को अगली सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ने खुद बच्ची से बातचीत की। बातचीत के दौरान बच्ची ने पिता पर मारपीट और यौन उत्पीड़न जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए और साथ जाने से मना कर दिया। लेकिन कोर्ट ने अपनी पारखी नजर से भांप लिया कि बच्ची जिन घटनाओं और शब्दों का इस्तेमाल कर रही थी, वे उसकी उम्र और समझ से कोसों दूर थे।

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि माता-पिता के आपसी झगड़े में इतनी छोटी बच्ची को मोहरा बनाना उसके मानसिक स्वास्थ्य को बर्बाद करने जैसा है, और मां ने यही किया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई (17 अगस्त) तक बच्ची की कस्टडी पिता को सौंप दी है, जहां राज्य सरकार को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, मां को पिता के घर जाकर या वीडियो कॉल के जरिए बच्ची से मिलने की छूट रहेगी।

Location :  Maharajganj

Published :  11 July 2026, 1:45 PM IST