500 साल बाद भी नहीं बदली किस्मत… सैफई में गाड़िया लोहार समाज आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

सैफई के जसवंतनगर मार्ग स्थित गाड़िया लोहार समाज की बस्ती आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। करीब 20 वर्षों से यहां रह रहे परिवारों ने सरकार से आवास, शिक्षा और रोजगार की मांग की है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 27 May 2026, 6:22 PM IST

Saifai: देश आज विकास, स्मार्ट सिटी और डिजिटल इंडिया की बात कर रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के सैफई में एक ऐसा समाज भी है जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। सदियों से लोहे को पीटकर जिंदगी चलाने वाला गाड़िया लोहार समाज आज भी पक्के घर, शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से दूर है। दावा है कि महाराणा प्रताप के समय से भटकन और संघर्ष इस समाज की नियति बन गया है। अब सैफई की यह बस्ती सरकार और प्रशासन से अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की गुहार लगा रही है।

सैफई की बस्ती में अभावों के बीच जिंदगी

सैफई के जसवंतनगर मार्ग पर स्थित गाड़िया लोहार समाज की बस्ती में करीब 20 परिवार रहते हैं। इन परिवारों की कुल आबादी लगभग 140 से 150 लोगों की बताई जा रही है। यह पूरी बस्ती एक सूखे तालाब की जमीन पर बनी हुई है, जहां लोग झुग्गियों और अस्थायी टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। पानी झुग्गियों में भर जाता है और परिवारों के सामने रहने तक का संकट खड़ा हो जाता है।

500 वर्षों के संघर्ष का दावा

समुदाय के लोगों का कहना है कि उनका इतिहास महाराणा प्रताप के समय से जुड़ा है। उनका दावा है कि करीब 500 वर्षों से गाड़िया लोहार समाज स्थायी ठिकाने और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करता आ रहा है। समाज के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहे और आज भी हालात में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।

Holi: सैफई से अखिलेश यादव का सियासी संदेश, बोले – “हम सब लोग बहुरंगी रहें, मन से भी”

आज भी लोहे पीटने को मजबूर युवा

बस्ती में रहने वाले 21 वर्षीय प्रेमपाल ने बताया कि वह आज भी लोहे पीटने का काम करता है। उसका कहना है कि पढ़ाई और रोजगार के अवसर नहीं मिलने की वजह से आने वाली पीढ़ियां भी इसी काम तक सीमित रह जाएंगी। प्रेमपाल ने कहा कि यदि बच्चों को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलें तो वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं, लेकिन गरीबी और सुविधाओं की कमी उन्हें उसी पुराने जीवन में बांधे हुए है।

महिलाओं ने सुनाई पीड़ा

बस्ती की महिलाओं ने भी भेदभाव और बेरोजगारी का दर्द बयान किया। उनका कहना है कि आसपास के लोग उन्हें घरेलू काम तक नहीं देते। महिलाओं का आरोप है कि उनकी जाति और पारंपरिक पेशे की वजह से लोग दूरी बनाते हैं। ऐसे में परिवारों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।

बच्चों की शिक्षा सबसे बड़ी चिंता

बस्ती में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई भी बड़ी समस्या बनी हुई है। कई बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे, जबकि कुछ बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़कर परिवार के साथ काम करने लगते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिक्षा की उचित व्यवस्था हो जाए तो बच्चों का भविष्य बदल सकता है।

मेरठ के काले कोट पर आया अखिलेश यादव का दिल, सैफई आवास पर पहुंचे वेस्ट यूपी के टेलर, जानें पूरा मामला

अन्य राज्यों में मिली सुविधाएं

समुदाय के लोगों का कहना है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गाड़िया लोहार समाज के लोगों को आवास और अन्य सरकारी सुविधाएं मिल चुकी हैं। लेकिन सैफई में रहने वाले परिवार आज भी पक्के घर, पानी, शौचालय और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

Location :  Saifai

Published :  27 May 2026, 6:22 PM IST