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गंगा में अचानक छोड़े गए 244 नन्हे कछुए (Img : Dynamite News)
कासगंज : गंगा की लहरों में जैसे ही 244 नन्हे कछुओं ने कदम रखा, पानी में उनकी अठखेलियां शुरू हो गईं। कोई लहरों के साथ आगे बढ़ता नजर आया तो कोई पानी में डुबकी लगाकर अपने प्राकृतिक संसार की ओर निकल पड़ा। किनारे खड़े लोगों के लिए यह नजारा किसी रोमांच से कम नहीं था। अंडों से निकलकर सुरक्षित माहौल में विकसित हुए इन नन्हे जीवों को बुधवार को उनका प्राकृतिक आशियाना मिल गया। मौका था गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने की वर्षगांठ का।
इस अवसर पर लहरा गंगा घाट पर डब्लूडब्लूएफ-इंडिया ने जिला गंगा समिति और वन विभाग के सहयोग से कछुआ हैचलिंग्स के विमोचन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। चार नवंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में मीठे पानी में रहने वाली कछुओं की दो प्रजातियों पंगशुरा स्मिथी (ब्राउन रूफ्ड टर्टल) और पंगशुरा टेंटोरिया (इंडियन टेंट टर्टल) के कुल 244 नवजात कछुओं को गंगा नदी में छोड़ा गया। इन नन्हे मेहमानों की खास बात यह रही कि इनका जन्म जनपद कासगंज में गंगा नदी से संकलित किए गए अंडों से हुआ था।
अंडों से निकलने के बाद संरक्षण प्रक्रिया के तहत इन्हें सुरक्षित रूप से विकसित किया गया। निर्धारित संरक्षण प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इन नवजात कछुओं को दोबारा गंगा के प्राकृतिक आवास में पहुंचाया गया। नदी में छोड़े जाने के साथ ही इनका जीवन अब प्राकृतिक वातावरण में आगे बढ़ेगा।
इन नन्हे कछुओं का गंगा में विमोचन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मीठे पानी के कछुओं की घटती आबादी के संरक्षण और पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। अंडों के संरक्षण से लेकर नवजात कछुओं को सुरक्षित रूप से नदी में छोड़ने तक की प्रक्रिया का उद्देश्य उनकी प्राकृतिक आबादी को बढ़ावा देना है।
गंगा की लहरों में उतरे 244 नन्हे मेहमान
गंगा में लौटे ये नन्हे जीव अब अपने प्राकृतिक वातावरण में जीवन की नई शुरुआत करेंगे। इस पहल के माध्यम से कछुओं के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की दिशा में प्रयास किया गया।
गंगा केवल करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों जलीय जीवों का प्राकृतिक संसार भी है। कछुए नदी के पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और जलीय जैव विविधता का संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनका संरक्षण गंगा की प्राकृतिक विरासत को बचाने की दिशा में अहम कदम है।
लहरा घाट पर आयोजित इस पहल ने संदेश दिया कि गंगा को जीवंत बनाए रखने के लिए उसके पानी के साथ-साथ उसमें रहने वाले जीवों की सुरक्षा भी जरूरी है। कछुओं के प्राकृतिक आवास में लौटने से नदी की जैव विविधता के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी संजीव कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी प्रो. एसके रावत, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डब्लूडब्लूएफ-इंडिया के सीनियर परियोजना अधिकारी हिमांशु शर्मा, संबंधित क्षेत्रीय वनाधिकारी, स्थानीय कृषक एवं अन्य हितधारक मौजूद रहे।
Location : कासगंज
Published : 5 November 2026, 4:47 PM IST
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