
करोड़ों लोगों ने बदला अपना ऑपरेटर (Img- AI Generated)
New Delhi: भारतीय टेलीकॉम बाजार में ग्राहकों के बीच अपना ऑपरेटर बदलने की होड़ मची हुई है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की ओर से जारी टेलीकॉम सब्सक्रिप्शन की लेटेस्ट रिपोर्ट से एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 के महीने में भारत में लगभग 14.46 मिलियन (यानी 1.44 करोड़ से अधिक) मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) रिक्वेस्ट दर्ज की गईं।
इसका सीधा मतलब यह है कि मोबाइल यूजर्स अपना मौजूदा नंबर बदले बिना धड़ाधड़ अपनी टेलीकॉम कंपनी को बदल रहे हैं। हालांकि, यह संख्या अप्रैल महीने (14.74 मिलियन) के मुकाबले मामूली रूप से कम है, लेकिन करोड़ों की संख्या में ऑपरेटर बदलना कंपनियों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
TRAI अपनी रिपोर्ट में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के आंकड़ों को मुख्य रूप से दो जोन में विभाजित करता है। इसके तहत जोन-I में उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों को रखा गया है, जहां मई के दौरान लगभग 7.79 मिलियन उपभोक्ताओं ने नंबर पोर्ट करने के लिए आवेदन किया।
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वहीं, जोन-II में दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्य शामिल हैं, जहां कुल 6.67 मिलियन रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों द्वारा हाल ही में प्लान्स की कीमतों में की गई बढ़ोतरी और नेटवर्क में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में लोग एक से दूसरी कंपनी में स्विच कर रहे हैं।
अगर राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मई के महीने में पूरे देश में अपना मोबाइल ऑपरेटर बदलने के लिए सबसे ज्यादा रिक्वेस्ट उत्तर प्रदेश ईस्ट (UP East) सर्कल से आईं। इस अकेले सर्कल में लगभग 2.06 मिलियन पोर्टिंग रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। इसके बाद दूसरे पायदान पर उत्तर प्रदेश वेस्ट (UP West) रहा, जहां मई में लगभग 1.49 मिलियन MNP रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। इन दोनों उत्तर प्रदेश सर्कल्स को मिला दिया जाए तो कुल आंकड़ा 3.55 मिलियन (35.5 लाख) के पार निकल जाता है।
वहीं, जोन-II के राज्यों की बात करें तो बिहार इस सूची में शीर्ष पर रहा, जहां लगभग 1.41 मिलियन लोगों ने सिम पोर्ट कराया। इसके बाद मध्य प्रदेश में 1.37 मिलियन और पश्चिम बंगाल में 1.35 मिलियन रिक्वेस्ट आईं। अन्य बड़े राज्यों में गुजरात (0.90 मिलियन), महाराष्ट्र (0.87 मिलियन), राजस्थान (0.76 मिलियन) और दिल्ली (0.60 मिलियन) का नंबर आता है।
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) एक बेहद लोकप्रिय तकनीकी सुविधा है जो ग्राहकों को अपना पुराना नंबर बरकरार रखते हुए नया ऑपरेटर चुनने की आजादी देती है। भारत में इस अनूठी सेवा की शुरुआत सबसे पहले 25 नवंबर, 2010 को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हरियाणा में की गई थी। इसके बाद, 20 जनवरी, 2011 को इसे पूरे देश में आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया।
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उपभोक्ताओं की सहूलियत को और बढ़ाने के लिए 3 जुलाई, 2015 को पूरे देश में इंटर-LSA MNP सेवा की शुरुआत की गई, जिसकी मदद से कोई भी ग्राहक एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होने पर भी अपना पुराना नंबर आसानी से चालू रख सकता है।
हालांकि, ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर हो रहे इस माइग्रेशन का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन टेलीकॉम मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि देश में इस वक्त जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) और वोडाफोन आइडिया (Vi) के बीच चल रही 5G नेटवर्क और टैरिफ की जंग ही इसका असली कारण है।
Location : New Delhi
Published : 29 June 2026, 11:49 AM IST
Topics : Jio Vs Airtel tech news Telecom News TRAI Report