जानिये, UP और UK के पूर्व CM एनडी तिवारी के बारे में दस बड़ी बातें

डीएन ब्यूरो

यूपी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण तिवारी का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। डाइनामाइट न्यूज की इस स्पेशल रिपोर्ट में जानिये नारायण दत्त तिवारी से जुड़ी हुई पांच बड़ी बातें...

नारायण दत्त तिवारी ( फाइल फोटो)
नारायण दत्त तिवारी ( फाइल फोटो)

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 93 साल के थे।  एन डी तिवारी ने दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

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नारायण दत्त तिवारी (फाइल फोटो)

 

डाइनामाइट न्यूज़ की इस स्पेशल रिपोर्ट में जानिये नारायण दत्त तिवारी के जीवन से जुड़ी हुई पांच बातें..

1. एनडी तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं। उत्तर प्रदेश में उन्होंने वर्ष 1976-77, 1984-85 और 1988-89 तक तीन बार मुख्यमंत्री की गद्दी संभाली है। यूपी के बाद वह 2002 से 2007 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे और पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है

2. सन् 1990 के दशक में उन्हें प्रधानमंत्री का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पीवी नरसिम्हा राव को यह अंत में पीएम पद मिला। उन्हें पीएम की कुर्सी न मिलने का एक बड़ा कारण यह भी था कि वह महज 800 वोटों से उस समय लोकसभा का चुनाव हार गए थे।

3. एनडी तिवारी केंद्र में भी मंत्री रहे हैं। 1986-87 तक वह राजीव गांधी की कैबिनेट में विदेश मंत्री रहे। इसके अलावा वह वित्त मंत्री, उद्योग मंत्री भी रहे। साथ ही वह 2007 से 2009 तक वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

4. एनडी तिवारी इकलौते ऐसे नेता रहे, जिन्हें दो राज्यों का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला है औऱ राज्यपाल भी रहे।

5. वर्ष 2008 में रोहित शेखर ने उन्हें जैविक पिता बताते हुए कोर्ट में मुकदमा कर दिया था। जिस पर कोर्ट ने डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया लेकिन एनडी तिवारी ने अपना नमूना ही नहीं दिया। बाद में कोर्ट के आगे वह नतमस्तक हुए। एनडी तिवारी ने आखिरकार रोहित शेखर को कानूनी रूप से अपना बेटा माना और उसे अपनी संपत्ति का वारिस भी बनाया।

 

बेटे रोहित शेखर के साथ में एनडी तिवारी (फाइल फोटो)

6. उत्तराखंड में उन्हें विकास पुरूष के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि माना जाता है कि एनडी तिवारी राजनीतिक तौर पर उत्तराखंड को यूपी से अलग राज्य नहीं बनाना चाहते थे, वह पृथक राज्य के विरोधी रहे हैं। 

7. नारायण दत्त तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था। भारत का यह हिस्सा तब 1937 के बाद से यूनाइटेड प्रोविंस के तौर पर जाना जाता था। आजादी के बाद संविधान लागू होने पर इसे उत्तर प्रदेश का नाम मिला। नारायण दत्त तिवारी शुरुआती शिक्षा हल्द्वानी, बरेली और नैनीताल में हुई। बाद में तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए किया। उन्होंने एमए की परीक्षा में विश्वविद्याल को टाप भी किया था।

8. एनडी तिवारी पहली बार 1952 में कांग्रेस विधायक बने। एनडी तिवारी के बारे में सबसे दिलचस्प बात यहा भी है कि उनके राजनीति जीवन की शुरूआत सोशलिस्ट पार्टी से हुई। कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता 1963 से शुरू हुआ। 1965 में वह कांग्रेस के टिकट पर काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और पहली बार मंत्रिपरिषद में उन्हें जगह मिली।

9. एक जनवरी 1976 को तिवारी पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनका यह कार्यकाल बेहद छोटा रहा। 1977 के जयप्रकाश आंदोलन की वजह से 30 अप्रैल को उनकी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद वह फिर दो बार यूपी के सीएम बने।   

10. एनडी तिवारी एक ऐसी शख्सियत भी बन गये है, जिनकी मौत उनके जन्मदिन के दिन हुई। तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर को नैनीताल में हुआ जबकि उनकी मौत 18 अक्टूबर को ही दिल्ली में हुई। 

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