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लखनऊ/नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स गोरखपुर में एमबीबीएस कर रहे 11 छात्रों को देश की शीर्ष अदालत से बड़ी राहत मिली है। परीक्षा देने से वंचित रहे इन छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स प्रशासन को 11 याचिकाकर्ता व छात्रों समेत अन्य समान स्थिति वाले छात्रों की परीक्षा जरूर करानी चाहिए। छात्र अगर परीक्षा में पास होते है तो उनको अगली क्लास में प्रमोट किये जाने का आदेश भी अदालत ने दिया है।
कोरोना वायरस संक्रमण के प्रोटोकॉल के कारण एम्स गोरखपुर से एमबीबीएस कर रहे 11 छात्र कक्षा में कम उपस्थिति के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गये थे। एम्स प्रशासन ने इन छात्रों की परीक्षा कराने की मांग को भी अस्वीकर कर दिया था। परेशान छात्रों ने परीक्षा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
एमबीबीएम प्रथम वर्ष के 11 छात्र-छात्राओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कम उपस्थिति को लेकर भी बड़ा निर्णय दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एम्स गोरखपुर में कम उपस्थिति के कारण परीक्षा देने से वंचित रहे 11 छात्र-छात्राओं की फिर से परीक्षा होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने एम्स गोरखपुर को निर्देश दिया कि वह उन 11 प्रथम वर्ष के छात्रों की परीक्षा आयोजित करे, कोरोना प्रोटोकाल के कारण जिनकी उपस्थिति कम थी। परीक्षा से वंचित प्रथम वर्ष के मेडिकल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत मिली है।
कोर्ट ने एम्स गोरखपुर को निर्देश दिया है कि वह प्रथम वर्ष के 11 याचिकाकर्ता व छात्रों समेत अन्य समान स्थिति वाले छात्रों की परीक्षा आयोजित करे जिनकी अटेंडेंस कम है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस फैसले को मिसाल के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। यह परिस्थिति भिन्न है।
Published : 16 February 2021, 1:38 PM IST
Topics : AIIMS Gorakhpur एमबीबीएस एम्स गोरखपुर गोरखपुर परीक्षा मेडिकल स्टुडेंट लॉकडाउन सुप्रीम कोर्ट
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