ताईवान में अनोखा शिवलिंग

पूर्वी एशिया और चीन सागर के छोटे से देश ताईवान में योग्य वर और समर्थ व बलिष्ठ पुत्र की कामना करते हुए शिवलिंग की पूजा की जाती है। दीवाली की तरह प्रकाश पर्व पटाखों के साथ पूरे श्रद्धाभाव और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

Updated : 17 February 2017, 5:41 PM IST
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नई दिल्ली: भारत में शिव भगवान को काफी माना जाता है और भारत के अलावा भी कई जगहों पर शिव भगवान के मंदिर मौजूद है। ऐसा ही एक मंदिर ताइवान में भी मौजूद है। ताइवान वहीं देश है जिससे अलग होने की बातें चीन करता है और ‘‘वन चाइना पॉलिसी’’ का बखान करता है। पूर्वी एशिया और चीन सागर के छोटे से द्वीपीय देश ताईवान में योग्य वर और समर्थ एवं बलिष्ठ पुत्र की कामना करते हुए शिवलिंग की पूजा की जाती है और दिवाली की तरह प्रकाश पर्व पटाखों के साथ पूरे श्रद्धाभाव और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

ताईवान के पूर्वी भाग में आदिवासी समुदायों की बहुलता है जिसमें कुछ शिवलिंग के रूप में आदिदेव महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं और मन्नत मांगते हैं। ताईचेन के एक स्थानीय मंदिर के पुजारी चेन छुन चांग ने बताया कि त्साव समुदाय के लोग शिवलिंग की पूजा करते हैं। इस पूजा-अर्चना में योग्य वर और समर्थ एवं बलिष्ठ पुत्र की कामना की जाती है। फसल के पकने और परिवार में किसी शुभ कार्य के आरंभ में भी शिवलिंग के दर्शन की परंपरा है।

देश के अन्य भागों में मंदिरों में भी भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गयी है। पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में एक विशेष प्रकार की व्यवस्था है जिसमें पूजन सामग्री मंदिर प्रांगण में रखी होती है और लोग श्रद्धाभाव से इसके दाम दान पत्र में डाल देते हैं और पुजारी के सहयोग से पूजा करते हैं। पूजा जूता पहने की जा सकती है। पूजन सामग्री में एक पोथा, फल और कुछ अगरबत्तियां शामिल होती हैं। अगरबत्तियां मंदिर के कुछ द्वार पर रखे एक कुंड में जलायी जाती हैं। ताईवान में प्रत्येक नववर्ष के दूसरे पखवाडे में प्रकाश पर्व मनाया जाता है जो 15 दिन तक चलता है। इसमें ईष्ट देवों की पूजा-अर्चना करने के अलावा रोशनी की जाती है और आसमान में लालटेन उड़ाई जाती है। कागज के पुतले बनाए जाते हैं और पटाखे चलाए जाते हैं। यह पर्व पखवाड़ा पूरे देश में सामाजिक तौर पर मनाया जाता है।

ताईपे में स्थानीय सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष के ताईवान प्रकाश महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के प्रयास किए गए हैं। कागज के पुतलों में प्राचीन परंपरा को दिखाने के अलावा नयी तकनीक का समायोजन किया गया है। इन पुतलों में फूल-फल जैसी आकृतियां भी बनाई गयी हैं। पर्व के दौरान प्रत्येक शहर और मोहल्ले में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार झांकियां निकाली जाती हैं और पटाखे चलाए जाते हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक माने जाने वाले ताईवान ने पुरातन सभ्यता और नयी व्यवस्था बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। प्राचीन स्थलों को नये रूपों में पेश किया जा रहा है। पुराने मंदिरों और स्थलों को नए पर्यटन स्थलों को नये रूप में विकसित किया जा रहा है।

ताईवान समाज की 95 प्रतिशत आबादी चीन के हान समुदाय से संबंधित है। शेष आबादी ताईवान की मूल है। इन समुदायों में एमी, अतायाल, बुनून, कनकनावु, कावलन, पाईवान, पुवुमा, रुकाई, साईसीयत, सारोआ, साकीजाया, सेदिक, थाओ, तुरुकू और त्साओ हैं। ये आदिवासी समुदाय देश के पूर्वी भाग में रहते हैं। काओसियांग में राष्ट्रीय चेंग कुंग विश्वविद्यालय में एक सामाजिक विज्ञान अध्ययन के एक छात्र हान सान ने बताया कि ताईवानी समाज में गधा, कुत्ता और मुर्गे का विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। गधा ज्ञान एवं शक्ति, कुत्ता सतर्कता और मदद तथा मुर्गा समृद्धि, उत्पादकता और सुखद भविष्य का प्रतीक है। ताईवान के प्रत्येक घर और होटल तथा अन्य प्रतिष्ठानों में इनका प्रतीक आवश्यक रूप से होता है। (वार्ता)

Published : 
  • 17 February 2017, 5:41 PM IST

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