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संभल: चंदौसी के मुस्लिम बहुल मोहल्ला लक्ष्मण गंज में बांके बिहारी मंदिर के पास कुछ ही दूरी पर खाली प्लाट में दबी बावड़ी की तलाश में दूसरे दिन रविवार को खोदाई शुरू की गई। खुदाई के दौरान बावड़ी कुएं के चारों ओर कमरों की दीवारें और दरवाजे नजर आए।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार बताया जा रहा है कि यह बावड़ी कुआं 200 फीट गहराई तक जा सकता है, और इसमें तीन मंजिल तक कमरे बने हुए हैं। प्रशासन ने अब इसे इसके मूल स्वरूप में लाने के लिए खुदाई जारी रखने का फैसला किया है।

डीएम राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने मौके पर पहुंच कर जायजा लिया। डीएम ने बताया कि अभिलेखों में 400 वर्ग मीटर एरिया में बावड़ी तालाब के रुप में दर्ज है।
बिलारी के राजा के नाना के समय बावड़ी बनी थी। इसमें तीन मंजिल बनी हुई हैं। दो मंजिल मार्बल से बना है। ऊपर की मंजिल ईंटों से बनी है। इसमें कूप के साथ चार कक्ष भी बने हैं। यह बावड़ी 150 साल पुरानी बताई जा रही है। डीएम ने बताया कि जरुरत पड़ी तो स्टेट ऑर्किलॉजिकल सर्वे की टीम को पत्र भेजा जाएगा।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार बावड़ी से सुरंग भी जा रही है जो बांकेबिहारी मंदिर पर खुलती है। डीएम ने बताया कि मंदिर का जीर्णोधार किया जाएगा। जिससे लोग वहां पूजा कर सकें। इसके लिए अतिक्रमण को भी हटाया जाएगा।
पौराणिक नगरी संभल अब एक बार फिर से धार्मिक नगरी का रूप लेती जा रही है। संभल में रोज कहीं ना कहीं मंदिर, कुएं, पुरानी इमारतें निकल रही हैं। इसी क्रम में अब जिले के चंदौसी में प्राचीन बावड़ी भी निकल कर सामने आई है।
इस बावड़ी रहस्य उजागर होने के बाद प्रशासन ने बावड़ी की खुदाई का काम शुरू कर दिया है। उधर, चंदौसी के राजपरिवार ने इस बावड़ी पर दावा भी ठोंक दिया है। इस राजपरिवार की अंतिम महारानी सुरेंद्र बाला की पोती शिप्रा ने इसे अपनी दादालाई की प्रापर्टी बताया है।
Published : 22 December 2024, 5:01 PM IST
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