Rajasthan: ज्योति मिर्धा के भाजपा में शामिल होने पर बोले खाद्य मंत्री, राजनीति किसी की मोहताज नहीं

राजस्थान के खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचर‍ियावास ने ज्योति मिर्धा के कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामने पर प्रतिक्रिया जताते हुए सोमवार को कहा कि राजनीति किसी की मोहताज नहीं है और इसमें फैसला जनता करती है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट डाइनामाइट न्यूज़ पर

Updated : 11 September 2023, 5:38 PM IST
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जयपुर: राजस्थान के खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचर‍ियावास ने ज्योति मिर्धा के कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामने पर प्रतिक्रिया जताते हुए सोमवार को कहा कि राजनीति किसी की मोहताज नहीं है और इसमें फैसला जनता करती है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार नागौर से कांग्रेस सांसद रहीं ज्योति मिर्धा सोमवार को नयी दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा की राजस्थान इकाई के प्रमुख सीपी जोशी तथा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने उनका पार्टी में स्वागत किया।

इससे ठीक पहले, मिर्धा के भाजपा में जाने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर खाचरियावास ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘राजनीति में सबको अपना अधिकार है...चुनाव आ रहे हैं तो कोई भाजपा, कोई कांग्रेस में जा रहा है...यह सब देखने को मिलेगा।'’

उन्होंने कहा, ‘‘राजनीति किसी की मोहताज नहीं, राजनीति में जनता फैसला करती है...ऊपर वाले के आशीर्वाद से फैसला आता है। इस वक्त कांग्रेस राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है जो पूरा देश देख रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आगे क्या होगा, क्या नहीं, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन ये वे लोग हैं जो सक्रिय नहीं हैं...एक ऐसा भी व्यक्ति होता है जो सक्रिय रहता है... आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल सक्रिय व्यक्ति हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय से निकलकर अपनी पार्टी बनाई, लेकिन ज्योति मिर्धा तो कांग्रेस के बैनर तले चुनाव जीतीं।’’

मिर्धा परिवार दशकों तक राजस्थान के मारवाड़ की राजनीति की धुरी रहा है। ज्योति मिर्धा के दादा नाथूराम मिर्धा की कांग्रेस और राज्य की राजनीति में अच्छी पकड़ थी। नाथूराम सांसद और विधायक भी रहे थे। नाथूराम की पोती ज्योति मिर्धा पेशे से चिकित्सक हैं। उन्होंने 2009 में नागौर से लोकसभा चुनाव जीता, लेकिन 2019 का लोकसभा चुनाव हार गईं।

नागौर जाट बहुल इलाका है। पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नागौर सीट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल आरएलपी के लिए छोड़ दी थी। आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल इस सीट से विजयी रहे और कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को हार का सामना करना पड़ा। बेनीवाल बाद में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर राजग से अलग हो गए।

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी सवाई सिंह चौधरी ने भी सोमवार को भाजपा का दामन थाम लिया। चौधरी ने 2018 का विधानसभा चुनाव खींवसर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।

Published : 
  • 11 September 2023, 5:38 PM IST

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