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महराजगंज: भूमि विवाद के मामले में दो वर्ष पूर्व निचलौल थाने पर बुलाकर दलित युवक को प्रताड़ित करने और एकतरफा शांतिभंग की कार्रवाई करना तत्कालीन थानाध्यक्ष रामाज्ञा सिंह को महंगा पड़ता नजर आ रहा है।
पीड़ित ने पहले पुलिस के उच्चाधिकारियों से इस मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई थी लेकिन जब कही सुनवाई नहीं हुई तो वह कोर्ट पहुंच गया। अब न्यायालय ने मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष रामाज्ञा सिंह, आरक्षी परमहंस गौड़ समेत तीन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार पिपरा काजी गांव के रहने वाले पीड़ित सिद्धार्थ गौतम का उसके गांव पर ही विपक्षियों से भूमि विवाद चल रहा था। इस संबंध में तीन जुलाई 2022 को दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया था।
आरोप है कि थाने पर विपक्षीगणों से मिलकर निचलौल पुलिस ने थाने पर ही प्रताड़ित करते हुए न सिर्फ उसे भला-बुरा कहा, बल्कि हवालात में बंद कर दिया। कुछ समय बाद एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए शांतिभंग में चालान भी कर दिया, लेकिर चालानी रिपोर्ट में पुलिस ने फर्जी मामला लिखते हुए दिखाया कि गिरफ्तारी गांव से विवाद करते हुए की गई।
पीड़ित ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस महानिदेशक को भी शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पीड़ित के आवेदन के आधार पर विशेष न्यायाधीश अनन्य विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट शाकिर हसन ने तत्कालीन थानाध्यक्ष रामाज्ञा सिंह, आरक्षी परमहंस गौड़ तथा एक अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। अब मामला गरमा गया है।
Published : 3 June 2024, 9:49 AM IST
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