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महराजगंज: जिले में सड़क हादसों के ग्राफ में पिछले कुछ दिनों से एकाएक तेजी आ गयी है। रोजमर्रा का सामान्य सफर भी शहर वासियों के लिये अचानक डरावना सा लगने लगा है। प्रशासन की तरफ से सड़क पर सुरक्षा की गारंटी खत्म होती सी दिख रही है। कुछ भ्रष्ट अफसरों की शह पर बेतरतीब तरीके और नियम कानूनों को तोड़कर चल रहे वाहनों की लंबी फेहरिस्त आम आदनी के रोजाना के सफर को और भी भयावह व कष्टकारी बना रहा है।
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सिस्टम की नाकामी के नतीजे
इंसानी फितरत है कि वह छिटपुट दुर्घटनाओं को अक्सर होनी का नाम देकर भूल जाता है, लेकिन कुछ हादसों की तासीर इंसान को उम्र भर सालती रहती है। जब हादसे एकाएक बढ़ जायें और हर रोज सड़कों पर सफर के दौरान लोग मौत के आगोश में समाने लगें तो समझिये यह हरगिज होनी नहीं हो सकती। ऐसे सड़क हादसे मानवीय भूल और सिस्टम की नाकामी के नतीजे के अलावा और कुछ नहीं हो सकते।
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तीन दिन में 8 मौतें, डेढ़ दर्जन घायल
महराजगंज जिले में भी पिछले कुछ दिनों से ऐसे ही दिल दहलाने वाले सड़क हादसे देखने-सुनने को मिल रहे हैं। जिले के लिये इस सप्ताह का शुरूआती दिन भी मनहूस और खौफनाक साबित हुआ। सोमवार को सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के सिसवा अमहवा गांव के पास हुए टेंपो हादसे ने 4 लोगों को हमेशा के लिये गहरी नींद सुला दिया जबकि 11 लोग आज भी जीवन औऱ मौत के बीच जूझ रहे हैं। बुधवार को जिले मे दो सड़क हादसे हुए। बुधवार सुबह पुरंदरपुर थाना क्षेत्र में बोकवा-मोहनापुर बाईपास पर कार हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी, जबकि दो लोग बुरी तरह घायल है। बुधवार को तीसरा हादसा नौतनवा थाना क्षेत्र में मुंडला गांव के पास हुआ, जिसमें एक जीप खड़े ट्रक से टकरा गया जिसमें आधा दर्जन लोग घायल हो गये। जिले में तीन दिनों में अलग-अलग सड़क हादसों में 8 लोगों की मौत हो गयी जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग गम्भीर रूप से घायल हैं।

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विभागीय अफसरों की रिश्वतखोरी
जिले में सड़क हादसों की बढ़ती ऱफ्तार ने जहां सड़कों पर भय का माहौल खड़ा कर दिया है, वहीं कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिये है। परिवहन विभाग अगर चाहे तो ओवरलोडिंग, ओवरस्पीडिंग, अनफिट और परमिट नियमों का उल्लघंन कर शहर भर में दौड़ रहे टेंपो-वाहनों पर जब चाहे तब लगाम कस सकता है, लेकिन विभागीय अफसरों में इच्छाशक्ति की भारी कमी और रिश्वतखोरी की बड़ी चाह उन्हें ऐसा करने से रोक देती है। सिसवा अमहवां में हुए बड़े हादसे के बाद से एआरटीओ रामचंद्र भारती भी छुट्टी पर है। जबकि ट्रैफिक इंस्पेक्टर बड़जोड़ सिंह भी शहर में परिवहन संचालन के प्रति गंभीर प्रतीत नहीं होते।

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एआरटीओ दफ्तर में सन्नाटा
डाइनामाइट न्यूज़ टीम इस बड़े मुद्दे के बाबत जब एआरटीओ दफ्तर पंहुची तो ऐसे लगा.. जैसे वहां छाया सन्नाटा बोल रहा हो कि विभाग गहरी नींद में सो रहा है। एआरटीओ कार्यालय का गेट बंद था। अंदर दफ्तर में जाने पर देखा तो वहां सभी कुर्सियां खाली पड़ी अफसरों का इंतजार कर रही थी। वहां कुछ मौजूद लोगों से जब सड़क हादसों के बारे में बात करने की कोशिश की गयी तो वे इधर-उधर भागने लगे। एआरटीओ के सुरक्षा गार्ड से जब उनके अफसर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि साहब छुट्टी पर हैं।

दोषियों की कब होगी छुट्टी?
ट्रांसपोर्ट विभाग की लापरवाही से जिले में जिस तरह सड़क हादसे बढ़ रहे है, उससे देखकर यही लगता है कि साहब ही नहीं बल्कि पूरा विभाग ही छुट्टी पर हो लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन सड़क हादसों के दोषियों की कब ‘छुट्टी’ करता है?
Published : 20 June 2018, 5:49 PM IST
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