
महराजगंज: श्रावण मास का प्रारंभ इस बार सोमवार से हुआ है। भगवान भोलनाथ के भक्त पूरे सावन महीने अपने आराध्य का जलाभिषेक करेंगे। डाइनामाइट न्यूज की टीम सोमवार को उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद के ऐसे क्षेत्र में पहुंची जहां भगवान शिव के बउरहवा रूप धारण करने की पौराणिक कथाएं सामने आईं।
सिसवा-घुघली मार्ग पर घिवहां उर्फ हरपुर पकड़ी गांव में स्थित बउरहवा बाबा मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए लंबी लाइन लगाये अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे।
व्यापारी को पुत्र रत्न की प्राप्ति
जनश्रुतियों के अनुसार वर्षों पूर्व एक निःसंतान घी के व्यापारी घृतवाह को संतान प्राप्ति के लिए बउरहवा बाबा का स्वप्न में दर्शन हुआ। इस पर घृतवाह ने घिवहां में जमीन से निकले शिवलिंग की खोजकर कई दिनों तक भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इसके उपरान्त घृतवाह को भगवान शिव का दर्शन हुआ। भगवान शिव ने उसे पुत्रवान बनने का आर्शीवाद दिया। शिव की कृपा से व्यापारी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
साधू वेषधारी महात्मा प्रकट होकर बने बउरहवा
दूसरी जनश्रुति के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती काशीनगरी से हिमालय की ओर जा रहे थे। साधू वेषधारी महात्मा प्रकट हुए थे। रास्ते में इसी स्थान पर माता उमा के आग्रह पर भगवान शिव ने बउरहवा रूप धारण किया था। तभी से इस स्थान का नाम बउरहवा बाबा पड़ गया। यह आज भी सिद्ध स्थान के रूप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से बउरहवा बाबा को बेलपत्र चढ़ाकर 108 बार जलाभिषेक करता है, बउरहवा बाबा उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।
चार खंडों में स्थापित मंदिर
बउरहवा बाबा मंदिर को चार खंडों में निर्मित कराया गया है। इस मंदिर में धरती से प्रकट बउरहवा बाबा शिवलिंग प्रथम खंड में स्थापित हैं। दूसरे खंड में विष्णु-लक्ष्मी, तीसरे खंड में मां जगदम्बा का स्थान दिया गया है। 70 फुट ऊंचे आकाशीय खंड पर महादेव शिव की प्रतिमा मंदिर के भीतर स्थापित की गई है। यहीं पर श्रावण मास के अतिरिक्त महाशिवरात्रि के अलावा प्रत्येक सोमवार को भक्तों का जनसैलाब देखने को मिलता है।
Published : 22 July 2024, 2:12 PM IST
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