DN Exclusive: लखनऊ के केजीएमयू को भी इलाज की जरूरत, उठने लगा मरीजों का भरोसा

डीएन संवाददाता

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के प्रयास परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं, जिसका खामियाजा अस्पतालों में इलाज के लिये पहुंचे मरीजों को दर-दर की ठोकरें खाकर भुगतनी पड़ रही है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़ें आखिर केजीएमयू से क्यों उठ रहा है मरीजों का भरोसा..

बिस्तर के अभाव में मरीजों को नहीं मिल पाता इलाज
बिस्तर के अभाव में मरीजों को नहीं मिल पाता इलाज

लखनऊ: यूपी सरकार राज्य के सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं देने का भले ही दावा करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इलाज के लिये बड़ी उम्मीद के साथ अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भारी निराशा झेलनी पड़ रही है। ऐसे ही कुछ मामले केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में आये दिन देखने को मिलते हैं, जहां मरीजों को बिस्तर के अभाव में इलाज से वंचित रहना पड़ता है। बहुत कम खुशनसीब लोगों को यहां बिस्तर औऱ इलाज समय पर संभव हो पाता है। 

लगभग एक माह पहले सीतापुर निवासी वेद प्रकाश सड़क हादसे में घायल हो गये थे। उसके परिजनों ने उसे पहले सीतापुर के अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया। मगर जब उसकी हालत में कोई सुधार न हुआ तो डॉक्टरों ने उसे लखनऊ केजीएमयू के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। 

रैफर करने की कहानी

बड़ी उम्मीद से केजीएमयू के पहुंचे वेद प्रकाश और उसके परिजनों को तब भारी निराशा झेलनी पड़ी जब यहां के डॉक्टरों ने भी उसका इलाज नही किया और उसे सीधे बलरामपुर अस्पताल भेज दिया गया। किसी मरीज को रैफर करने की कहानी जारी रही। बलरामपुर से भी डॉक्टरों ने उसे फिर से ट्रामा संटर रेफर करने की बात कही। जिसके बाद से मरीज के परिजन वेद प्रकाश को लेकर लगातार सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।

वेद प्रकाश के भाई ने डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में बताया कि सीतापुर में रक्षा बंधन के दिन एक गाड़ी ने उसके भाई को टक्कर मार दी थी। जिसमें उसको काफी गम्भीर चोटें आ गई थी। जिस अस्पताल में उसका इलाज चल रहा थास वहां उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है था।

इलाज के लिये बेचा सब कुछ

वेद प्रकाश के पिता का कहना है कि वह मजदूरी कर अपने बेटे का इलाज करा रहा है। इलाज के लिये उसने अपने पशुओं को भी बेच दिया है। अब उसके पास पैसे भी नहीं रह गए हैं और उसके बेटे की लगातार हालत बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि वह बड़ी उम्मीद के साथ ट्रामा सेंटर पहुंचे थे लेकिन डॉक्टरों ने इस मामले में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। वेद प्रकाश की हालत निरंतर बिगङती जा रही है और डॉक्टर उन्हें घर जाने की सलाह दे रहे हैं। वेद प्रकाश और उसके परिजनों का अस्पतालों और डॉक्टरों से भरोसा उठता जा रहा है।

ऑक्सीजन सिलेंडर दिया पर भर्ती नहीं किया

वेद प्रकाश के भाई का कहना है कि पिछले कई दिनों से डॉक्टर उसके भाई को ओपीडी और दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दे रहे हैं। उनके भाई का इलाज नहीं किया जा रहा है। जब ओपीडी ले जाते समय मरीज की हालत नाजुक हो गई और उसको सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी तो तब आनन-फानन में डॉक्टरों ने उसे ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर इलाज तो दिया। लेकिन फिर भी भर्ती नहीं किया गया। 

इस मामले पर डाइनामाइट न्यूज़ ने जब ट्रामा सेंटर के जिम्मेदार डॉक्टरों से बात करने की भी कोशिश की लेकिन सभी कन्नी काट गये। तब ट्रामा सेंटर के सीएमएस उदय भास्कर मिश्रा ने बताया कि वह लखनऊ में नहीं है और न हीं उन्हें इस घटना की कोई जानकारी है। वह वापस आकर ही मामले पर कुछ कह सकेंगे। 
 

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