बकरीद स्पेशल: कानपुर के बकरों में ‘कटप्पा’ का जलवा

डीएन संवाददाता

पूरे भारत में 2 सितंबर को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। बकरीद स्पेशल पर डाइनामाइट न्यूज़ आपको कुछ खास बकरों से मिलवाने जा रहा है, जिनके शौक और लाइफ स्टाइल जरा हटके हैं..


कानपुर: पूरे भारत में 2 सितंबर को बकरीद या ईद-उल-अज़हा का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन बकरे की कुर्बानी देना सवाब का काम माना जाता है। मंडी में विभिन्न नस्लों के बकरे नजर आते हैं। डाइनामाइट न्यूज़ को कानपुर में एक खास किस्म का बकरा देखने को मिला, जिसकी डाइट भी स्पेशल है। इन जनाब की कई खूबियां है- इनको खाने में ड्राई फ्रूट तो पीने में कोल्ड ड्रिंक चाहिए, इन्हें यहां सभी लोग कटप्पा के नाम से जानते हैं। 

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डाइनामाइट न्यूज़ बकरीद के इस अवसर पर आपको 'कटप्पा' से मिलाने जा रहा है। जानिए इसकी पूरी कहानी..

कटप्पा बेकनगंज में रेडीमेड शॉप के व्यापारी आक़िब की सरपरस्ती में रहता हैं। वहां उसके कई सारे दोस्त भी साथ में रहते हैं। कमोबेश सबकी लम्बाई साढ़े तीन फुट है, जो अपने आप में काफी बड़ा है, लेकिन फिर भी कटप्पा इन सब से अलग है। डाइनामाइट न्यूज़ जब बेकनगंज पहुंचा तो, देखा कि क्या बूढ़े, क्या बच्चे, महिला-पुरुष.. जो भी आक़िब की रेडीमेड की शॉप के सामने से गुज़रा, सभी टकटकी लगा कर इन बकरों को देखने के लिए रुके। 

कोल्ड ड्रिंक पीता बकरा

व्यापारी आकिब ने इन बकरों के नाम भी रखे हुए हैं। जिनमे से एक का नाम जलजला उर्फ 'कटप्पा', जिसकी खूबियों की चर्चा हम ऊपर भी कर चुके हैं। बाकी के नाम तूफ़ान और प्रिंस हैं, ये बकरे मार्केट में लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं और सोशल मीडिया पर भी ये खूब पॉपुलर हो रहे हैं। मार्केट से गुजरता हर बच्चा और बड़ा बकरों के साथ सेल्फी लेते हुए दिखा और पूरा मार्केट इन बकरों को देखने के लिए खचाखच भर गया।

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बकरों संग सेल्फी लेते लोग

कटप्पा को संभालने के लिये चाहिये 2-3 लोग

इन सभी बकरों में कटप्पा की खास बात यह है कि यह इतना भारी भरकम है कि मार्केट में इसे संभालने के लिए कम से कम दो से तीन आदमियों का सहारा लेना पड़ रहा था, अब आप समझ सकते है कि कुछ तो बात होगी इनमें। वजन की बात करें तो कटप्पा का वजन करीब 220 किलो तो वहीं तूफान 210 किलो के आसपास है। वैसे तो शॉप पर 6 से 7 बकरे आये थे लेकिन ये तीन बकरे लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। न केवल शहर बल्कि देश के कई राज्य और जिलों से इन बकरों को देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन व्यापारी आकिब के अनुसार इन बकरों की कोई बोली नहीं लगती, ये बकरे अनमोल है और इन्हें आक़िब खुद ही तैयार करते हैं और कुर्बानी के लिए इनका प्रयोग करते हैं।

बकरों को देखने उमड़ी भीड़

कोल्ड ड्रिंक भी पीते हैं जलजला और तूफान

डाइनामाइट न्यूज़ को व्यापारी आक़िब बकरे वाले ने बताया कि इस बार हमारे पास कटप्पा, प्रिंस और तूफान नाम वाले बकरे मौजूद है। बच्चे जलजला को कटप्पा के नाम से भी पुकारते हैं। वहीं उन्होंने बताया कि इन बकरों जैसा शहर में ऐसा कोई भी बकरा नही होगा। एक बकरे को तैयार करने के लिए तीन साल का समय लगता है। हम खुद ही इनका पालन पोषण करते हैं। इन्हें हम तैयार करने के लिए ड्राई फ्रूट्स खिलाते हैं, दूध पिलाते है। खास बात यह है कि हमारे ये बकरे कोल्डड्रिंक भी पीते हैं। इनकी सेवा में हम कोई कसर नही छोड़ते, इनके खानपान से लेकर सारी व्यवस्थाओं का खास इंतज़ाम रखा जाता है। गर्मी में कूलर की भी सुविधा इन बकरों को दी जाती है। जिसके लिए 5 से 6 लोग इन बकरों की सेवा में लगाए जाते हैं।

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