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नई दिल्लीः रोहिंग्याओं को उनके देश म्यांमार वापस भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से मना कर दिया है। वकील प्रशांत भूषण की याचिका को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने खारिज करते हुए इन्हें म्यांमार का ही नागरिक पाया है।
इससे अब असम में अवैध रूप से रह रहे सात रोहिंग्या घुसपैठियों को म्यांमार वापस भेजने का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि पिछले साल संसद में भारत सरकार ने बताया था कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में पंजीकृत चौदह हजार से अधिक रोहिंग्या भारत में रह रहे हैं।
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म्यांमार की सेना द्वारा पिछले साल दमन के बाद लाखों की तादाद में रोहिंग्या मुसलमान अपना घर और देश छोड़कर एशिया में भारत और बांग्लादेश में रह रहे हैं। यह माना जा रहा है कि अल्पसंख्यकों को भगाए जाने में यह रोहिंग्या मुसलमान विश्वभर में सबसे अधिक तादाद में है।
म्यांमार में हिंसा कि वजह से रखाइन प्रांत से करीब 30 हजार बौद्ध और हिंदू भी विस्थापित हुए थे। भारत में रोहिंग्या मुसलमानों को देश में नहीं रहने देने की सरकार ने अपनी नीति पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्पष्टीकरण दिया था।
वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के मामले में दखल देने से इनकार करने पर गृह मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि वीरवार को सात रोहिंग्या घुसपैठियों को मणिपुर में मोरेह सीमा पोस्ट पर म्यांमार प्रशासन को सौंपा जाएगा। वहीं इन आव्रजकों की असल पहचान की भई कोशिश की जाएगी।
Published : 4 October 2018, 11:48 AM IST
Topics : केंद्र सरकार घुसपैठ मुख्य न्यायाधीश म्यांमार याचिका रद्द रखाइन प्रांत रंजन गोगोई रोहिंग्या मुसलमान वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट
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