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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संपदा संचय, एकाधिकार या दो लोगों को अधिकार मिलने और मीडिया में कुछ वर्गों के उदय के साथ ही अनुचित तरीकों का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ने की प्रवृत्ति की अनदेखी करने के विनाशकारी परिणाम होंगे।
उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में व्यवस्था दी कि कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति करेंगे ताकि ‘चुनावों की शुचिता’ बनी रहे। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश शामिल होंगे।
न्यायमूर्ति के एम जोसफ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि लोकतंत्र के केंद्र में रहने वाला बुनियादी सिद्धांत मतदान के माध्यम से जनता को अधिकार देना है।
Published : 3 March 2023, 11:04 AM IST
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