Guru Gobind Singh Jayanti 2025: क्या है 5 ककार का मतलब, जिन्हें गुरु गोबिंद सिंह ने बनाया सिखों की शान

सिख धर्म के 10वें और अंतिम गुरु, गुरु गोबिंग सिंह जी ने 5 ककार का उल्लेख किया था, जो सिख धर्म के लिए खास माने जाते हैं। डाइनामाइट न्यूज़ पर पढ़िए पूरी खबर

Updated : 6 January 2025, 12:32 PM IST
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नई दिल्ली: गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के 10वें और अंतिम गुरु थे। माना जाता है कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपना पूरा जीवन सच्चाई की राह पर चलते हुए और लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। सिख धर्म के 10वें और अंतिम गुरु, गुरु गोबिंग सिंह जी ने 5 ककार का उल्लेख किया था, जो सिख धर्म के लिए खास माने जाते हैं। 

केश

डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, 5 ककार 'क' अक्षर से शुरू होते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण केश हैं। सिखों के लिए केश रखना जरूरी माना गया है, क्योंकि लंबे बाल आध्यात्म का प्रतीक होते हैं। दूसरा कंघा है। 

कंघा 

प्रत्येक खालसा को अपने पास कंघा रखना जरूरी होता है, क्योंकि आध्यात्म के साथ ही सांसारिक होना भी जरूरी है और लंबे बालों की देखभाल करने के लिए कंघे की ज़रूरत होती है। 

कच्चेरा 

तीसरा कच्चेरा है, जिसका मतलब कच्छा होता है और इसे स्फूर्ति का प्रतीक माना गया है। 

कड़ा 

चौथा कड़ा है, हर खालसा को नियम और मर्यादा में रहने की चेतावनी देने के उद्देश्य से कड़ा धारण करना ज़रुरी बताया गया है। लोहे का कड़ा सिखों की ईश्वर के साथ अटूट बंधन और सदा अच्छे कर्म करने की याद दिलाता है।

कृपाण 

पांचवा ककार कृपाण है, खालसा पंथ से जो लोग जुड़े होते हैं वो धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से साधु होते हुए भी एक योद्धा के रूप में माने जाते हैं इसलिए वे हमेशा अपने पास कृपाण रखते हैं। 

सिखों के दसवें गुरु थे गुरु गोविंद सिंह

गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। पिता गुरु तेग बहादुर जी की मृत्यु के बाद 11 नवंबर, 1675 में वह गुरु बने। वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक गुरु थे। साल 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी और उन्होंने सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया, साथ ही उन्हें गुरु रूप में सुशोभित किया गया। 

गुरु गोविंद सिंह जी का जन्मदिन

गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व सिख धर्म का एक पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो सिख धर्म के दसवें गुरु थे। गुरु जी ने अपने जीवन में सिख धर्म को एक नई दिशा दी और इसे एक संगठित और सशक्त रूप दिया। उन्होंने 'खालसा पंथ' की स्थापना की और सिखों को धर्म, न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनका जीवन बलिदान, साहस और मानवता की सेवा का प्रतीक है।

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Published : 
  • 6 January 2025, 12:32 PM IST

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