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नई दिल्लीः आज पाकिस्तान, सऊदी अरब समेत कई देशों में बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। वहीं, भारत में यह त्योहार कल मनाया जाएगा। बकरीद का त्योहार रमजान का महीने खत्म होने के 70 दिन के बाद मनाया जाता है। ये दिन मुस्लमानों के लिए बहुत खास माना जता है।
त्योहार के मौके पर इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग सुबह नमाज अदा करते हैं, इसके बाद आपस में गले मिलकर एक दूसरे को ईद की बधाई देते हैं। इसके बाद जानवर की कुर्बानी देने की प्रथा हैं। इस्लाम धर्म की मान्यता के हिसाब से आखिरी पैगंबर (मैसेंजर) हजरत मोहम्मद हुए। हजरत मोहम्मद के वक्त में ही इस्लाम ने पूर्ण रूप धारण किया और आज जो भी परंपराएं या तरीके मुसलमान अपनाते हैं, वो पैगंबर मोहम्मद के वक्त के हैं।

हजरत इब्राहिम 80 साल की उम्र में पिता बने थे। उनके बेटे का नाम इस्माइल था। हजरत इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल को बहुत प्यार करते थे। एक दिन हजरत इब्राहिम को ख्वाब आया कि अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान कीजिए। इस्लामिक जानकार बताते हैं कि ये अल्लाह का हुक्म था और हजरत इब्राहिम ने अपने प्यारे बेटे को कुर्बान करने का फैसला लिया।

हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर बेटे इस्माइल की गर्दन पर छुरी रख दी। जैसे ही वो छुरी से कुर्बानी देने ही वाले थे कि वहां पर एक दुंबा प्रकट हो गया, जब हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखें खोली तो देखा कि उनका बेटा उनके पास मौजूद था। माना जा रहा है कि ये हजरत इब्राहिम के एक इम्तिहान की तरह था, जिसमें वो सफल हो गए थे। यहीं से शुरू हुई जानवरों की कुर्बानी देने की प्रक्रिया।
Published : 20 July 2021, 1:20 PM IST
Topics : Eid Ul Adha 2021 इतिहास ईद उल अज़हा त्योहार बकरीद
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