दिवाली पर निभाएं सामाजिक दायित्व, इस तरह मनाएं प्रदूषण मुक्त ग्रीन दिवाली

डीएन संवाददाता

इसमें भी कोई संदेह नहीं कि दिवाली पर अत्यधिक पटाखों के कारण सबसे ज्यादा प्रदूषण भी फैलता है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़ें, दिवाली के इस खास मौके पर आप अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कैसे कर सकते हैं..

पटाखे नहीं, अहम को जलाने का संदेश देती बच्ची
पटाखे नहीं, अहम को जलाने का संदेश देती बच्ची

नई दिल्ली: दिवाली को प्रकाश पर्व और दीपोत्सव के नाम से भी माना जाता है, इसलिये इस त्योहार पर एक अलग तरह का उल्लास दिखाई देता है। चारों तरफ तरफ जगमगाहट और तरह-तरह की रोशनी पूरे माहौल में चार चांद लगा देती है। लेकिन इस मौके पर अति उत्साह के कारण कुछ लोग जमकर आतिशबाजी भी करते है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा होती है। आतिशबाजी के कारण न केवल ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ता है बल्कि आतिशबाजी से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार आदि लोगों को खासा परेशानी भी होती है। हर किसी को यह पर्व मनाना चाहिये लेकिन इस मौके पर हर किसी को अपने सामाजिक दायित्वों का भी भी बखूबी निर्वहन करना चाहिये।

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डाइनामाइट न्यूज़ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़ें, इस दिवाली को प्रदूषण मुक्त बनाने और समाज के हित में आप अपने दायित्वों का किस तरह निर्वहन कर सकते हैं..  

मिट्टी से बने दीयों का करें इस्तेमाल 

1.    हो सके तो पटाखों का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें, यदि मन न माने तो पटाखों का कम से कम इस्तेमामल कीजिये। ऐसे पटाखें जलाएं, जो परंपरागत पटाखों के मुकाबले कम खतरनाक, कम नुकसानदायक, कम शोर मचाने वाले और कम प्रदूषण फैलाने वाले हों।

2.     जहां तक हो सके इलेक्ट्रिक लाइट्स की जगह प्राकृतिक रूप से तैयार दियों का इस्तेमाल करें। इससे बिजली की भी बचत होगी और जगमगाते दीपकों से प्राकृतिक रोशनी भी मिल सकेगी।

3.     अगर आपको इलेक्ट्रिक लाइट्स लगानी ही पड़े तो एलईडी लाइट्स का इस्तेमाल कीजिए। एलईडी लाइट्स से लगभग 80 प्रतिशत तक बिजली की खपत कम की जा सकती है।

4.    घर में सजावट के लिए आर्टिफिशियल उत्पादों के स्थान पर प्राकृतिक तरीके से निर्मित उत्पादों का इस्तमाल करें। सजावट के लिये प्लास्टिक या फाइबर के गुलदस्तों के स्थान पर प्राकृतिक गुलदस्तों का इस्तेमाल करें, जिससे घर खुशबू से महक उठेगा।

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बनाएं प्राकृतिक रंगोली 

 

5.    घर पर अगर रंगोली बनानी हो तो केमिकल से बने रंगों के बजाए रंगोली में प्राकृतिक फूलों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करे। असली फूलों के रंगों से बनी रंगोली ज्यादा आकर्षक होती है।

6.    दिवाली हो और उसमें खान-पान और मिठाइयों की बात न हो, ऐसा मुश्किल है। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में कृत्रिम रंग और मिलावट का खतरा रहता है। इसलिये घर पर ही मिठाई बनाने का प्रयास करें।

7.     घर पर दूध, बेसन, नारियल, ड्राई फ्रूट्स जैसी नेचुरल चीजों से मिठाई बनाई जा सकती है। इसके अलावा कुछ खाने के लिये कुछ पांरपरिक चीजें भी बनाई जा सकता है। यह न केवल शुद्ध होंगे बल्कि इनमें ज्यादा पोषक तत्व भी होंगे और मिलावट का डर भी नहीं रहेगा।

8.    दिवाली पर महंगे गिफ्ट खरीदने से अच्छा है कि आप खुद ही कुछ यादगार गिफ्ट तैयर करें, जिसमें पैंटिंग से लेकर कई तरह की चीजें शामिल हो सकती है। दिवाली पर कार्ड्स इत्यादि खरीदने के बजाए खुद ही कार्ड्स बनाइए।

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वंचितों के चहरों पर रोशनी लाने का करें प्रयास 

 

9.    दिवाली पर ज्यादा खर्च करने के बजाए कुछ वंचित लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने का प्रयास कीजिये। आप उन्हें अपनी सामर्थ्य के हिसाब से कुछ भी दान कर सकते हैं। दिवाली के बाद सर्दियां आने वाली हैं, ऐसे वंचित लोगों को आप पुराने कपड़े भी दे सकते हैं।

10.    दिवाली पर आप किसी आप किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम जा कर भी वहां रहने वालों लोगों के साथ दिवाली मना सकते है। उनका दर्द समझ सकतें है और जितना संभव हो सके उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकते हैं। 

हां, ध्यान रखिये इस दिवाली पर पटाखों से दूरी बनाये रखिये। 

 

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