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नयी दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (आप) नेता मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर मंगलवार को अपना फैसला 26 अप्रैल के लिए सुरक्षित रख लिया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार विशेष न्यायाधीश एम के नागपाल ने सिसोदिया की उस अर्जी पर दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें यह दावा करते हुए राहत का अनुरोध किया गया है कि जांच के लिए अब उनकी हिरासत की जरूरत नहीं है।
ईडी ने अर्जी का यह कहते हुए विरोध किया कि जांच एक 'महत्वपूर्ण' चरण में है और दावा किया कि दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने यह दिखाने के लिए गढ़े हुए ई-मेल मंगाये थे कि नीति को जनता की सहमति है। धनशोधन रोधी संघीय एजेंसी ने यह भी कहा कि उसे कथित अपराध में उनकी मिलीभगत के नए सबूत मिले हैं।
ईडी की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार मट्टा ने न्यायाधीश को बताया कि एजेंसी इस महीने के अंत तक सिसोदिया तथा सह-आरोपी अरुण पिल्लई और अमनदीप ढल के खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र दायर कर सकती है।
अदालत ने ईडी द्वारा दर्ज धनशोधन के मामलों में सोमवार को सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 29 अप्रैल तक बढ़ा दी थी। साथ ही इसने सीबीआई द्वारा जांच किये जा रहे कथित घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में भी सिसोदिया की हिरासत 27 अप्रैल तक बढ़ा दी।
अदालत ने 31 मार्च को भ्रष्टाचार के मामले में सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और कहा था कि दिल्ली में उनके और सरकार में उनके सहयोगियों के लिए लगभग 90-100 करोड़ रुपये की अग्रिम रिश्वत के कथित भुगतान के पीछे आपराधिक साजिश में वह ‘‘प्रथम दृष्टया षड्यंत्रकर्ता’’ थे।
अदालत ने कहा था कि इस समय आप के वरिष्ठ नेता की रिहाई ‘‘जांच पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।’’
सीबीआई और ईडी ने सिसोदिया को अब रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 बनाने और क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और इससे उत्पन्न धन के शोधन के आरोप में गिरफ्तार किया था।
Published : 18 April 2023, 6:55 PM IST
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