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नई दिल्ली: नवरात्रि में देवी मां के 9 रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। इनकी उपासना करने से हर प्रकार के रोगों के मुक्ति मिलती है।
ऐसा है मां कूष्माण्डा का स्वरूप
मां कूष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मां के पास हाथ में अमृत कलश भी है। इनका वाहन सिंह है।
कहा जाता है कि मांकूष्मांडा की हंसी से ब्रह्मांड की सृष्टि हुई थी। मां के इस रूप की अराधना से आयु, यश की वृद्धि होती है। मां कूष्माण्डा विधि-विधान से पूजा करने से इंसान के जीवन में से रोगों और शोकों का नाश होता है और समृद्धि की प्राप्ती होती है।
इस मंत्र का जाप कर करें मां कूष्माण्डा की पूजा
या देवि सर्वभूतेषू सृष्टि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
Published : 9 April 2019, 10:01 AM IST
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