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नई दिल्ली: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। ये मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।
मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमण्डल रहता है। शास्त्रों में देवी ब्रह्मचारिणी को हिमालय की पुत्री बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है।
इस मंत्र-जाप से करे मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम
ब्रह्मचारिणी की पूजा की विधि
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करते हुए ऊपर लिखा मंत्र बोलें।
Published : 7 April 2019, 11:07 AM IST
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