चौक-डस्टर छोड़ थामा फेरारी का स्टेयरिंग, मिलिए भारत की पहली महिला फेरारी रेसर Diana Pundole से

पुणे की डायना पुंडोले दो बच्चों की मां होने के बावजूद आज इंटरनेशनल फेरारी रेसिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला रेसर हैं। बहरीन और जेद्दा जैसे F1 ट्रैक्स पर पोडियम फिनिश कर उन्होंने दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। आइए जानते हैं इनकी दिलचस्प स्टोरी के बारे में।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 1 July 2026, 1:49 PM IST

New Delhi: हर किसी की जिंदगी में वो एक टर्निंग पॉइंट आता है, जहां एक तरफ सुरक्षित भविष्य का सुकून होता है और दूसरी तरफ जोखिमों से भरे बड़े सपनों का आसमान। पुणे की Diana Pundole के सामने भी यही मोड़ था। हाथ में चौक-डस्टर थामकर टीचर बनने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने  नौकरी की बजाय रफ्तार से भरी मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया को अपनी दुनिया बनाया। आज की रफ्तार भरी दुनिया में डायना ने ऐसा गियर बदला कि उनका नाम इंटरनेशनल फेरारी रेसिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय महिला के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है।

पिता के सपने ने दी नई उड़ान

डायना के इस तूफानी सफर की नींव बचपन में ही पड़ गई थी। उनके पिता फॉर्मूला-1 के बड़े फैंस थे और उन्होंने ही अपनी नन्हीं बेटी की आंखों में स्पीड का जुनून बोया था। महज सात साल की उम्र में पहली बार गो-कार्टिंग का अनुभव लेने वाली डायना के लिए यही शौक आगे चलकर करियर बन गया। पिता के निधन के बाद भी उनकी प्रेरणा डायना की सबसे बड़ी ताकत बनी रही।

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तानों के बीच नहीं छोड़ा हौसला

ट्रैक पर उतरना आसान नहीं था। शुरुआत में हार मिली, भयानक एक्सीडेंट्स हुए और समाज की घिसी-पिटी सोच ने उनके कानों में यह भी फूंका कि "मोटरस्पोर्ट्स महिलाओं के बस की बात नहीं है।" लेकिन डायना ने इन आलोचनाओं को ब्रेक नहीं, बल्कि एक्सीलेटर की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने कड़ी मेहनत, सख्त अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास से हर बाधा को ओवरटेक कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर दिखाया दम

साल 2024 डायना की जिंदगी का गोल्डन ईयर साबित हुआ। एमआरएफ नेशनल रेसिंग चैंपियनशिप के सैलून कार वर्ग में खिताब जीतने के बाद उन्हें फेरारी चैलेंज मिडिल ईस्ट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। अबू धाबी, बहरीन और जेद्दा के जिन वर्ल्ड-क्लास फॉर्मूला-1 सर्किट्स पर दुनिया के दिग्गज रेसर्स के पसीने छूट जाते हैं, वहां डायना ने अपनी फेरारी को पोडियम (टॉप-3) तक पहुंचाकर पूरी दुनिया को भारतीय नारी का दम दिखाया।

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सुपरमॉम साबित हुईं डायना

डायना की कहानी सिर्फ एक रेसर की नहीं, बल्कि एक 'सुपरमॉम' की है। दो बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों की रफ्तार धीमी नहीं होने दी। घर संभालते हुए रोजाना की फिटनेस, मेंटल ट्रेनिंग और ट्रैक की बारीक स्ट्रैटेजी पर काम करना उनकी दिनचर्या है।

Location :  New Delhi

Published :  1 July 2026, 12:58 PM IST