स्मित मच्छार की आचार्य रामचंद्र दास ने की सराहना, कहा- भारत की धरती अपने साहस और समर्पण के लिए जानी जाती

आचार्य रामचंद्र दास ने डाइनामाइट न्यूज कार्यालय में युवाओं, हनुमान चालीसा अभियान, पायलट स्मित के साहस और सकारात्मक पत्रकारिता पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने युवाओं से कुसंगति से बचने, सकारात्मक सोच अपनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 October 2026, 3:18 PM IST

New Delhi: दुनिया भर में प्रसिद्ध संत और जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के आधिकारिक उत्तराधिकारी एवं तुलसी पीठाधीश्वर के पद पर आसीन आचार्य रामचंद्र दास जी डाइनामाइट न्यूज के दिल्ली स्थित प्रधान कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने डाइनामाइट न्यूज के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश से विशेष बातचीत की और देश में चल रहे विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

आचार्य रामचंद्र दास ने डाइनामाइट न्यूज की युवा पत्रकारों की टीम से भी मुलाकात की। उन्होंने पत्रकारिता में जिम्मेदारी, सकारात्मक खबरों की भूमिका और नकारात्मक खबरों की बढ़ती होड़ पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल घटनाओं को सामने रखने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के विचार और दिशा को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। इस दौरान उन्होंने एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश की ऊर्जा और डाइनामाइट न्यूज की टीम के काम की सराहना की।

पायलट स्मित के साहस को बताया अद्भुत

बातचीत के दौरान जब उनसे फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट स्मित मच्छार द्वारा संकट की स्थिति में यात्रियों की जान बचाने और उनके साहस के बारे में पूछा गया तो आचार्य रामचंद्र दास ने भारतीय संस्कृति और यहां की मिट्टी की विशेषता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के देश अपनी ऊंची इमारतों, बेहतर संसाधनों या मजबूत अर्थव्यवस्था के कारण महान माने जाते होंगे, लेकिन भारत की धरती अपने साहस, पुरुषार्थ, त्याग और समर्पण के लिए जानी जाती है। उनके मुताबिक पायलट स्मित ने जिस परिस्थिति में यात्रियों की रक्षा की, वह साहस और कर्तव्यबोध का उदाहरण है।

आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि जिस तरह पायलट स्मित ने संकट के बीच धैर्य और साहस का परिचय दिया, उससे देश और दुनिया को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने पायलट स्मित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस बातचीत में पायलट स्मित ने हनुमान चालीसा के पाठ से मिलने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा का जिक्र किया था।

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'हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या, विवेक और साहस के देवता'

आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि हनुमान जी को भारतीय परंपरा में बल, बुद्धि, विद्या, विवेक और साहस का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता अपनी ऊर्जा और क्षमता को सही दिशा देने की है। उन्होंने बताया कि युवाओं को आध्यात्मिक और सकारात्मक दिशा से जोड़ने के उद्देश्य से 11 करोड़ से अधिक हनुमान चालीसा पाठ का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में किसी आर्थिक सहयोग की अपेक्षा नहीं है, बल्कि हनुमान चालीसा की 'भिक्षा' मांगी जा रही है।

आचार्य रामचंद्र दास के मुताबिक, इसी अभियान के तहत दिल्ली में भी लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक दिल्ली में प्रतिदिन करीब पांच हजार विद्यार्थी हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके अलावा 2 फरवरी को तालकटोरा स्टेडियम में 21 हजार युवाओं के एक साथ पाठ का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उन्होंने 17 नवंबर को कोलकाता में भी बड़े स्तर पर हनुमान चालीसा पाठ के आयोजन का उल्लेख किया।

आचार्य रामचंद्र दास जी महाराज (img: Dynamite News)

'युवा शक्ति को जागृत करने की जरूरत'

युवाओं को हनुमान चालीसा से जोड़ने की प्रेरणा के सवाल पर आचार्य रामचंद्र दास ने भारत की ज्ञान परंपरा और युवाओं की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अलग-अलग दौर में दुनिया को ज्ञान और नेतृत्व दिया है। उनके मुताबिक भारत की परंपरा में युवा शक्ति हमेशा परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण ताकत रही है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के युवाओं ने दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को रखा।

आचार्य रामचंद्र दास ने युवाओं को नकारात्मक प्रभावों और गलत संगति से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को विवाद, अपशब्दों और क्षणिक लोकप्रियता में लगाने के बजाय राष्ट्र निर्माण और समाज के सकारात्मक कार्यों में लगाएं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह संदेश देना है कि देश का युवा सनातन परंपरा, राष्ट्र और अपने बड़ों के सम्मान की भावना रखता है और अपनी सकारात्मक शक्ति के माध्यम से समाज में योगदान दे सकता है।

'ऊर्जा केवल शारीरिक शक्ति से नहीं, सकारात्मक सोच से भी आती है'

आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि युवा ऊर्जा को केवल शारीरिक क्षमता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक सकारात्मक विचार, आध्यात्मिक चेतना, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने मन को सकारात्मक विचारों से भरता है और अपने आराध्य की शरण लेता है तो उसके भीतर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास पैदा हो सकता है।

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Gen-Z को दिया खास संदेश

Gen-Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं के लिए संदेश देते हुए आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि संयोग से उनका जन्म वर्ष भी 1997 है, इसलिए वह स्वयं को आज की भाषा में Gen-Z का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने विचारों को पवित्र और सकारात्मक रखने की अपील की। उन्होंने तुलसीदास की पंक्ति का उल्लेख करते हुए कुसंगति से बचने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमता, पुरुषार्थ और विवेक को हमेशा जागृत रखना चाहिए और देश के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। उनके मुताबिक क्षणिक लोकप्रियता के लिए अपशब्दों या नकारात्मक गतिविधियों का सहारा लेने के बजाय युवाओं को ऐसा काम करना चाहिए जिससे समाज और देश को लाभ पहुंचे। आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि युवा जब अपने विचार और मन को सकारात्मक रखते हुए अपनी ऊर्जा को राष्ट्र के विकास में लगाएंगे, तभी उनकी युवावस्था सार्थक होगी।

एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश (img: Dynamite News)

'भारत का युवा बहुत ऊर्जावान और समझदार है'

आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि भारत का युवा ऊर्जावान होने के साथ-साथ समझदार भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य के दम पर भारत आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि युवा यदि सही दिशा, सकारात्मक सोच और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़े तो भारत के विकास की गति और मजबूत हो सकती है।

डाइनामाइट न्यूज के युवा पत्रकारों से बातचीत के दौरान आचार्य रामचंद्र दास ने पत्रकारिता की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज समाचार माध्यमों के सामने बड़ी जिम्मेदारी है। खबरों में नकारात्मकता और सनसनी के साथ-साथ समाज को प्रेरित करने वाली सकारात्मक घटनाओं को भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से तथ्य, जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है और पत्रकारों को अपनी भूमिका की गंभीरता को समझना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने डाइनामाइट न्यूज के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश की ऊर्जा और टीम के काम की सराहना की। उन्होंने युवा पत्रकारों को शुभकामनाएं देते हुए सकारात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता को आगे बढ़ाने की बात कही।

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कौन हैं आचार्य रामचंद्र दास?

आचार्य रामचंद्र दास महाराज को जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज का आधिकारिक उत्तराधिकारी बताया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका मूल नाम जय मिश्रा है और उनका संबंध उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है। वर्ष 2018 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था और वर्ष 2019 में उनका औपचारिक पट्टाभिषेक हुआ। वे तुलसी पीठ से जुड़े धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के साथ रामानंद मिशन और सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं।

डाइनामाइट न्यूज के साथ बातचीत में आचार्य रामचंद्र दास ने युवाओं को सकारात्मक दिशा देने, आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति यदि अपने पुरुषार्थ, विवेक और ऊर्जा को सही दिशा में लगाए तो देश के भविष्य को नई मजबूती मिल सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  3 October 2026, 3:18 PM IST