AAP ने राज्यसभा में बड़ा बदलाव करते हुए राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया है। इसके बाद पार्टी और चड्ढा के बीच दूरी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानिए पूरा मामला, वजह और इसके सियासी मायने।

केजरीवाल के करीबी रहे राघव अब दूर क्यों? (IMG: Dynamite News)
New Delhi: राजनीति में कई बार वार खुलकर नहीं, चुपचाप किए जाते हैं और असर ज्यादा गहरा होता है। आम आदमी पार्टी में इन दिनों कुछ ऐसा ही खेल चलता दिख रहा है। पार्टी के युवा और चर्चित चेहरे राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाना और फिर उनके बोलने के समय पर भी सवाल खड़े होना, अब सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं लग रहा। सियासी गलियारों में इसे ‘साइलेंट एक्शन’ कहा जा रहा है।
आम आदमी पार्टी ने एक अहम फैसला लेते हुए राज्यसभा में उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटा दिया और उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त कर दिया। यह बदलाव अचानक हुआ और इसके पीछे की वजहों पर आधिकारिक तौर पर ज्यादा कुछ नहीं कहा गया। लेकिन इस फैसले ने पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मामला सिर्फ पद से हटाने तक सीमित नहीं रहा। पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र लिखकर यह भी कहा गया कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने का समय न दिया जाए। अगर ये बात पूरी तरह सही है, तो यह कदम और भी बड़ा माना जा रहा है।
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राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता रहा है। आंदोलन के दिनों से ही वे पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं। 2015 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने 2019 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि जीत नहीं सके। लेकिन 2020 में राजेंद्र नगर से विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत की। इसके बाद उन्हें पंजाब की जिम्मेदारी दी गई और 2022 में वे राज्यसभा पहुंचे, जहां वे सबसे युवा सांसदों में से एक बने।
पार्टी के अंदर दरार की चर्चाएं उस वक्त तेज हुईं जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे और उसी दौरान राघव चड्ढा अपनी पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन में छुट्टियां मनाते नजर आए। सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों ने पार्टी के भीतर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें पंजाब की सक्रिय राजनीति से दूर रखा गया, जो संकेत देता है कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के बड़े मुद्दों पर उतने सक्रिय नहीं दिखे। संसद से लेकर सड़क तक, उनकी मौजूदगी पहले जैसी आक्रामक नहीं रही। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे और धीरे-धीरे यह दूरी अब खुलकर सामने आ रही है।
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जहां विपक्ष इसे आम आदमी पार्टी के अंदरूनी मतभेद का बड़ा संकेत बता रहा है, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता अशोक कुमार मित्तल ने इसे सामान्य संगठनात्मक बदलाव बताया है।
पूरे घटनाक्रम पर राघव चड्ढा ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर उन्होंने अपनी बात इशारों में रखी। उन्होंने कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए, वे एक दरिया हैं जो वक्त आने पर सैलाब बन सकता है।