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पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी ने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। इसमें बर्तन मांजने वाली कलिता माझी को आउसग्राम सीट से टिकट मिला है, जो अब चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।
कलिता माझी
West Bengal: सियासत के मैदान में इस बार कहानी किसी बड़े नेता या रसूखदार चेहरे की नहीं, बल्कि उस महिला की है जो कभी दूसरों के घरों में बर्तन मांजती थी। गरीबी, संघर्ष और अनदेखी के बीच से निकलकर चुनावी रण में उतरना आसान नहीं होता, लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐसा नाम सामने आया है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है।
बंगाल चुनाव में BJP का बड़ा दांव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कलिता माझी को लेकर हो रही है। उन्हें पूर्वी वर्धमान जिले की आउसग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। यह दूसरी बार है, जब पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
बर्तन मांजने से चुनावी मैदान तक
कलिता माझी की कहानी संघर्ष से भरी है। वह दूसरों के घरों में काम करके महीने के केवल 3 से 4 हजार रुपये कमा पाती हैं। उनके पति सुब्रतो माझी प्लंबर का काम करते हैं। वर्ष 2021 के चुनाव में हार के बाद वह फिर अपने पुराने काम पर लौट गई थी, लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और मेहनत ने उन्हें दोबारा टिकट दिला दिया।
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पहले भी लड़ चुकी हैं चुनाव
साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कलिता ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था। उस समय उन्हें 88,577 वोट मिले थे और वह बेहद कम अंतर से हार गई थी। यही करीबी मुकाबला इस बार उनके लिए उम्मीद की वजह बना और पार्टी ने एक बार फिर उन पर दांव लगाया है।
उम्मीदवार बनने के साथ जुड़ा विवाद
इस बार उनकी उम्मीदवारी के साथ एक कानूनी विवाद भी सामने आया है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची में उनका नाम “विचाराधीन” श्रेणी में रखा गया है। इसको लेकर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है और मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। हालांकि, कलिता का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं और उन्हें चुनाव लड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी।
क्या हैं कलिता के चुनावी मुद्दे
कलिता माझी का कहना है कि वह खुद गरीब परिवार से आती हैं, इसलिए आम लोगों की समस्याओं को बेहतर समझती हैं। उनके मुख्य मुद्दों में स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल हैं। वह अपने क्षेत्र में अस्पताल बनवाना चाहती हैं। जिससे गरीबों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े। साथ ही वह बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर दिलाने की बात कह रही हैं।
पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
पीएम नरेंद्र मोदी भी कलिता की मेहनत और आत्मसम्मान की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने उन्हें राजनीति में एक मिसाल और समाज के लिए उम्मीद की किरण बताया था। कलिता माझी की उम्मीदवारी इस बात का संकेत है कि राजनीति अब केवल बड़े चेहरों तक सीमित नहीं रह गई है। जमीनी स्तर से उठकर भी लोग चुनावी मैदान में अपनी पहचान बना सकते हैं।