UP Politics: बाहुबलियों को कैसे मिले शस्त्र लाइसेंस? हाईकोर्ट ने मांगी आपराधिक कुंडली और सुरक्षा का पूरा ब्योरा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में बाहुबलियों को दिए गए शस्त्र लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने राजा भैया, बृजभूषण सिंह, अब्बास अंसारी और धनंजय सिंह समेत कई लोगों की आपराधिक कुंडली तलब की है। सरकार के मुताबिक प्रदेश में 6062 दागी लोगों के पास शस्त्र लाइसेंस हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 May 2026, 12:42 PM IST

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते ‘गन कल्चर’ और बाहुबलियों को दिए गए शस्त्र लाइसेंसों पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आपराधिक मामलों में घिरे लोगों को आखिर शस्त्र लाइसेंस कैसे दिए गए और उन्हें सरकारी सुरक्षा किस आधार पर मिली।

हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी, बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह समेत कई प्रभावशाली लोगों की आपराधिक कुंडली और सरकारी सुरक्षा का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।

सरकार के हलफनामे से चौंका कोर्ट

प्रदेश सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइेंसधारी हैं। इनमें 6062 ऐसे लोग हैं जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और पूछा कि आखिर गंभीर आरोपों के बावजूद ऐसे लोगों को हथियार रखने की अनुमति कैसे दी गई।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह आदेश संतकबीर नगर निवासी जय शंकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इससे पहले कोर्ट ने प्रदेशभर में जारी शस्त्र लाइसेंसों की मंडलवार जानकारी भी मांगी थी।

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कई बाहुबलियों के लाइसेंस की जांच के आदेश

कोर्ट ने लखनऊ जोन और कमिश्नरेट क्षेत्र के कई चर्चित नामों की भी जानकारी मांगी है। इनमें खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंघाला, अतुल वर्मा, गुड्डू सिंह और अन्य कई नाम शामिल हैं।

इसके अलावा राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, विनीत सिंह और उदयभान सिंह समेत कई प्रभावशाली लोगों के शस्त्र लाइसेंस की जांच के आदेश दिए गए हैं।

‘दबदबा कायम रखने के लिए हथियारों की खेप’

कोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रदेश के कई बाहुबली और उनके करीबी लाइसेंसी हथियारों की बड़ी संख्या रखते हैं। इसका मकसद केवल आत्मरक्षा नहीं, बल्कि समाज में दबदबा और दहशत कायम रखना भी होता है।

जान का खतरा बताकर कई लोग एक से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस हासिल कर लेते हैं, जबकि उनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज होते हैं।

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हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

हाईकोर्ट ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों और पुलिस कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र देकर जानकारी प्रस्तुत करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि कोई जानकारी छिपाई गई तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में सुरक्षा नहीं बल्कि भय का माहौल पैदा करता है। ऐसा माहौल सामाजिक सद्भाव को कमजोर करता है और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बनता है।

Location :  Allahabad

Published :  23 May 2026, 12:41 PM IST