जंतर-मंतर के आंदोलन से लेकर विधानसभा सत्र तक लापता हैं तेजस्वी यादव, जब बीजेपी ने तीखे सवालों से घेरा तो मचा सियासी घमासान

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के गायब रहने पर सियासी घमासान मच गया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में उनका पता लगाकर सूचना देने की मांग की है, जबकि बीजेपी ने उन्हें अंशकालिक नेता करार दिया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 July 2026, 10:15 AM IST

Bihar: बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई है। विधानसभा के मानसून सत्र से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शनों तक, हर जगह आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के गायब रहने से सत्ता पक्ष को बड़ा मौका मिल गया है। स्थिति इतनी गर्मा गई है कि कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष से तेजस्वी यादव का पता लगाकर सदन को आधिकारिक रूप से सूचित करने तक की मांग कर डाली है।

सदन से लेकर सड़क तक, विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति पर सवाल

बिहार विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और राज्य में कई अहम राजनीतिक मुद्दे गरमाए हुए हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सदन से नदारद हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेता सड़क पर उतरे। बिहार में भी कुछ जगह प्रदर्शन हुए, लेकिन तेजस्वी यादव का कहीं कोई अता-पता नहीं चला। उन्होंने आखिरी बार 16 जुलाई को सोशल मीडिया पर कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करते हुए एक पोस्ट किया था, जिसके बाद से वह पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं।

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कृषि मंत्री का तंज और आरजेडी का अंदरूनी दर्द

विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के नेता की गैरमौजूदगी पर तीखा प्रहार करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अध्यक्ष प्रेम कुमार से आग्रह किया कि वे तेजस्वी यादव की खोज खबर लें और सदन को उनके ठिकाने के बारे में बताएं।

दूसरी ओर, आरजेडी के भीतर भी नेता की लगातार लंबी छुट्टियों को लेकर दबी जुबान में चिंता जताई जा रही है। पार्टी के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि तेजस्वी पटना में होते, तो स्नातक कॉलेजों को राज्य विश्वविद्यालयों से अलग करने वाले बिल और अन्य मुद्दों पर पार्टी विधानसभा के अंदर और बाहर कहीं अधिक मजबूत प्रदर्शन कर सकती थी। विधायक ने यह भी स्वीकार किया कि आगामी बांकीपुर उपचुनाव के लिए पार्टी के पास प्रचार करने के लिए कोई ठोस चेहरा नहीं है, जबकि जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर को अच्छा समर्थन मिल रहा है।

पिछले छह सालों में कब-कब गायब रहे हैं तेजस्वी यादव?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महत्वपूर्ण अवसरों पर पटना से बाहर रहना तेजस्वी यादव के लिए कोई नई बात नहीं है। पिछले छह वर्षों में वे छह से अधिक बार ऐसे मौकों पर बिहार से दूर रहे हैं, जब पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी-

दिसंबर 2025 - जनवरी 2026: विधानसभा चुनाव के बाद दिसंबर के पहले सत्र में सिर्फ एक दिन शामिल होने के बाद, वे परिवार के साथ एक महीने की यूरोप यात्रा पर निकल गए और जनवरी के मध्य में लौटे।

दिसंबर 2024: शीतकालीन सत्र के पहले दिन संक्षिप्त उपस्थिति दर्ज कराने के बाद वे दिल्ली रवाना हो गए और पूरा सत्र खाली सीट के साथ बीता।

जून - जुलाई 2024: लोकसभा चुनाव में आरजेडी को महज 4 सीटें मिलने के ठीक बाद वे 10 दिन के विदेश दौरे पर चले गए, जिसके कारण पार्टी का 30वां स्थापना दिवस 1 जुलाई को ही करना पड़ा और उन्होंने विदेश से ही वर्चुअल भाषण दिया।

मार्च 2021: विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक के दौरान सदन में भारी हंगामा और हाथापाई हुई, विधायकों को अस्पताल जाना पड़ा, लेकिन सत्र खत्म होते ही तेजस्वी तुरंत दिल्ली निकल गए।

दिसंबर 2019 - जनवरी 2020: सीएए और एनआरसी के विरोध में रैलियों की शुरुआत करने के बाद, आंदोलन के ठीक चरम पर वे लगभग तीन सप्ताह तक सार्वजनिक मंचों से गायब रहे।

सितंबर - अक्टूबर 2019: पटना में भीषण बाढ़ और जलभराव के दौरान वे गोवा और हरियाणा के रेवाड़ी में व्यस्त रहे, जबकि अन्य नेताओं ने बाढ़ के पानी में उतरकर राहत कार्य किए।

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बीजेपी और आरजेडी आमने-सामने

बीजेपी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। प्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष संतोष पाठक का कहना है कि एनडीए का मुख्य मकसद तेजस्वी को "अंशकालिक राजनीतिज्ञ" या "वर्क फ्रॉम होम करने वाला नेता" के रूप में बेनकाब करना है।

वहीं, बचाव की मुद्रा में आए आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एनडीए अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए तेजस्वी यादव को बलि का बकरा बना रही है। मेहता ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य का खजाना खाली क्यों है, छात्र सड़कों पर क्यों हैं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 11 महीने से वेतन क्यों नहीं मिला और बेरोजगारी व अपराध बेकाबू क्यों हैं—सरकार को इन सवालों के जवाब देने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आरजेडी एक संस्थागत तंत्र के रूप में पूरी मजबूती से काम कर रही है और उनके कार्यकर्ता लगातार छात्रों तथा जनता के मुद्दों पर धरने-प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

Location :  Bihar

Published :  25 July 2026, 10:15 AM IST