बांकीपुर में हार के बाद RJD में गृहयुद्ध, चार नेताओं के चार सुर, क्या लालू-राबड़ी की खामोशी के पीछे छिपा है बड़ा सियासी तूफान?

बांकीपुर उपचुनाव में RJD की जमानत जब्त होने के बाद पार्टी और लालू परिवार में जबर्दस्त खींचतान शुरू हो गई है। तेजस्वी, तेज प्रताप, मीसा और रोहिणी के अलग-अलग सुर और लालू-राबड़ी की चुप्पी से पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 6 August 2026, 9:16 AM IST

Patna: बिहार की राजनीति में दशकों तक एकछत्र प्रभाव रखने वाला लालू प्रसाद यादव का परिवार और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) आज अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है।

बांकीपुर उपचुनाव में RJD उम्मीदवार की जमानत जब्त होने के बाद पार्टी के भीतर बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ जहां शीर्ष नेतृत्व खामोश है, वहीं दूसरी तरफ परिवार और संगठन के भीतर से उठते अलग-अलग सुर यह साफ बता रहे हैं कि RJD में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

लालू परिवार में चार नेता, चार दिशाएं

उपचुनाव के नतीजे आते ही लालू परिवार के चार प्रमुख सदस्यों ने चार अलग-अलग दिशाओं में बयानबाजी की, जिससे पार्टी की किरकिरी हो रही है। तेजस्वी यादव ने इस नतीजे को बीजेपी की हार करार दिया, तो वहीं तेज प्रताप यादव ने एक कदम आगे बढ़कर प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जनसुराज को बधाई दे डाली। सांसद मीसा भारती ने जनसुराज को बीजेपी की 'लोमड़ी' बताया, तो रोहिणी आचार्य ने प्रशांत किशोर के जमीनी संघर्ष की तारीफ करते हुए तेजस्वी यादव के पार्ट-टाइम राजनीति वाले रवैये पर सीधा निशाना साध दिया।

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वरिष्ठ नेताओं का फूटा गुस्सा, संगठन में बगावत

पार्टी के भीतर सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि जमीनी नेता भी अब अपनी भड़ास निकालने लगे हैं। पांच बार के विधायक भाई वीरेंद्र ने तेजस्वी यादव के करीबी और सांसद संजय यादव के गुट के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के पुराने कैडर का मानना है कि AC कमरों में बैठकर फैसले लेने वाले सलाहकारों की वजह से पार्टी आज अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गई है और जनता से RJD का जुड़ाव पूरी तरह टूट चुका है।

लालू-राबड़ी की रहस्यमयी चुप्पी, तूफान से पहले की शांति?

हर राजनीतिक मुद्दे पर बेबाकी से राय रखने वाले लालू प्रसाद यादव की चुप्पी इस वक्त सबसे ज्यादा रहस्यमयी बनी हुई है। अस्वस्थता के बावजूद सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले लालू यादव ने बांकीपुर चुनाव में न तो कोई संदेश जारी किया और न ही नतीजों पर कोई प्रतिक्रिया दी। राबड़ी देवी भी लंबे समय से शांत हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि लालू-राबड़ी का यह मौन किसी बड़ी कार्रवाई या पार्टी के भीतर बड़े फेरबदल की पूर्वपीठिका हो सकता है।

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क्या RJD में होने वाला है कोई बड़ा फैसला?

स्थापना के तीन दशक बाद RJD जिस दोराहे पर खड़ी है, वहां से आगे का रास्ता आसान नहीं दिखता। तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर परिवार के भीतर से ही उठते सवाल और नेताओं की गुटबाजी यह इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में राष्ट्रीय जनता दल या तो एक बड़े पुनर्गठन से गुजरेगा या फिर पार्टी को किसी बड़े विभाजन का सामना करना पड़ सकता है।

Location :  Patna

Published :  6 August 2026, 9:16 AM IST