
मोदी का सम्मान बनाम राहुल की यात्रा
New Delhi: 27 अगस्त को बिहार के दरभंगा में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के स्वागत के लिए मंच तैयार किया गया था। इसी मंच से मोहम्मद रिजवी नाम का शख्स अचानक पहुंचा और माइक संभालते ही पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उस वक्त राहुल गांधी वहां मौजूद नहीं थे, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही दरभंगा के बीजेपी जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण चौधरी ने एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी रिजवी को 28 अगस्त की रात गिरफ्तार कर लिया। लेकिन यह मामला यहीं नहीं रुका। 29 अगस्त को पटना में बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर लाठी-डंडे चले, गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई और माहौल पूरी तरह चुनावी रंग ले चुका।
बीजेपी ने इस घटना को तुरंत राजनीतिक मुद्दा बना लिया।
•जेपी नड्डा ने कहा कि यह सिर्फ पीएम मोदी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को माफी मांगनी चाहिए।
•योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि यह राजनीतिक मर्यादा का पतन है। जनता इसका जवाब देगी।
•गिरिराज सिंह ने तो मंच पर मौजूद न होने का अफसोस जताते हुए कहा कि अगर वह होते तो “गाली देने वाले की जुबान खींच लेते।
•अमित शाह ने असम दौरे के दौरान इस मुद्दे को और बड़ा बनाते हुए कहा कि कांग्रेस को जितनी गालियां मोदी जी को देनी हैं, दें। हर गाली के बाद कमल का फूल और ज्यादा खिलेगा।
शाह ने कांग्रेस के पुराने बयानों की भी सूची गिनाई मौत का सौदागर, नीच आदमी, रावण, भस्मासुर और कहा कि जनता हर बार कांग्रेस को ही सबक सिखाती है।
मोदी का सम्मान बनाम राहुल की यात्रा
मोदी को अपशब्द कहने का चुनावी असर
यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी को लेकर अपमानजनक बयान चुनावी मुद्दा बने हों।
•2017 गुजरात चुनाव में मणिशंकर अय्यर ने मोदी को “नीच किस्म का आदमी” कहा था।
मोदी ने इसे तुरंत चुनावी मंचों से उठाया और नतीजा यह हुआ कि बीजेपी ने सत्ता बचा ली।
•2022 गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी की तुलना “रावण” से की थी। नतीजे में बीजेपी को रिकॉर्ड 156 सीटें मिलीं।
पॉलिटिकल एनालिस्ट अमिताभ तिवारी के मुताबिक, मोदी को लेकर निजी हमले हमेशा कांग्रेस के खिलाफ ही जाते हैं, क्योंकि इससे न्यूट्रल और फ्लोटिंग वोटर मोदी के पक्ष में जुड़ जाते हैं।
1.हिंदू वोटरों का ध्रुवीकरण- चूंकि गाली देने वाला शख्स मुस्लिम है, इसलिए बीजेपी इसे हिंदू वोटरों को एकजुट करने के लिए इस्तेमाल करेगी।
2.न्यूट्रल वोटरों का झुकाव- बिहार में बीजेपी का कोई स्थानीय चेहरा नहीं है। चुनाव पूरी तरह मोदी के नाम पर लड़ा जा रहा है। ऐसे में फ्लोटिंग वोटर (लगभग 25%) मोदी फैक्टर से प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि राशिद किदवई का मानना है कि “SIR (वोटर लिस्ट से नाम काटने) का मुद्दा भी बड़ा है। गाली विवाद भावनात्मक असर डालेगा, लेकिन जमीनी मुद्दे पूरी तरह दबेंगे नहीं।”
कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को बीजेपी की चाल बताया।
•अलका लांबा ने कहा कि यह प्लांटेड स्टोरी है, ताकि राहुल की यात्रा से ध्यान हटाया जा सके।
•पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह बीजेपी की टूलकिट है। खुद ही लोगों को भेजते हैं, गाली दिलवाते हैं और फिर इसे मुद्दा बनाकर हिंसा करते हैं।
•सचिन पायलट ने साफ कहा कि “किसी भी पार्टी में अभद्र भाषा की जगह नहीं है। दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने सीधे तौर पर इस विवाद पर कुछ नहीं कहा, लेकिन 29 अगस्त को उन्होंने लिखा कि सत्य और अहिंसा के आगे असत्य और हिंसा टिक ही नहीं सकते।
यह भी सच है कि बीजेपी के नेता भी समय-समय पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं।
•सोनिया गांधी को कभी “जर्सी गाय”, “50 करोड़ की गर्लफ्रेंड” और “बार गर्ल” कहा गया।
•राहुल गांधी को लगातार “पप्पू”, “फरार शहजादा” और “ड्रग एडिक्ट” तक कहा गया।
यानी अपमानजनक भाषा का खेल एकतरफा नहीं है, फर्क सिर्फ इतना है कि बीजेपी इन बयानों को भुनाने में कांग्रेस से ज्यादा माहिर साबित होती है।
Location : New Delhi
Published : 30 August 2025, 3:04 PM IST
Topics : Amit Shah Bihar Election Narendra Modi Rahul Gandhi