
बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (सोर्स- एक्स)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी अभी से तेज होने लगी है। इसी कड़ी में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने सूबे की सियासत में अपनी सक्रियता को बढ़ाते हुए बड़ा ऐलान किया है। मिर्जापुर के चुनार क्षेत्र स्थित कैलहट के एक लॉन में आयोजित विंध्याचल मंडल के कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी के रुख को स्पष्ट किया गया। इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि और बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने दो टूक कहा कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में जदयू उत्तर प्रदेश में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।
पार्टी का मुख्य आधार बिहार में हुए विकास कार्य और सरकार की उपलब्धियां होंगी। इस घोषणा के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में जदयू के उतरने से यहां के पारंपरिक वोट बैंक और समीकरणों पर कितना असर पड़ेगा।
चुनावी तैयारियों का जायजा लेने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए आयोजित इस विंध्याचल मंडल सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता एसपी सिंह ने की। सम्मेलन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष कल्पनाथ वर्मा और महासचिव सुशील कश्यप ने भी अपने विचार साझा किए और संगठन को धार देने की बात कही। कार्यक्रम में विंध्याचल मंडल प्रभारी संजय सिंह, प्रदेश महासचिव अवधेश सिंह, प्रयागराज मंडल प्रभारी हरिशंकर पटेल, सुशील पटेल, अभिषेक कुमार राय और शालिनी सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। नेताओं ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर घर-घर संपर्क करें और बिहार सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व नीतियों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाएं, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके।
UP Election 2027: किसके पाले में जाएगा यूपी का खेल? SP-BJP की टक्कर में इन समीकरणों पर टिकी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में जदयू के उतरने से कई सीटों पर वोटों के ध्रुवीकरण और बंटवारे की पूरी संभावना है। खासकर पूर्वांचल के विंध्याचल और प्रयागराज जैसे मंडलों में, जहां जातियों का समीकरण जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाता है, वहां जदयू की मौजूदगी कुछ दलों के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। बिहार मॉडल और विकास कार्यों के विमर्श को सामने रखकर पार्टी उन मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की कोशिश करेगी जो क्षेत्रीय दलों से अलग एक नया विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, यूपी की चुनावी जमीन पर अपने दम पर आधार खड़ा करना और वोटों के बिखराव को अपने पक्ष में साधना जदयू के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन इतना तय है कि उसकी यह एंट्री मुख्य राजनीतिक दलों के समीकरणों को जरूर प्रभावित करेगी।
Location : Lucknow
Published : 13 September 2026, 9:05 AM IST
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