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रिसर्चर्स का मानना है कि लंबे समय तक कम तनाव में रहने वाले कुत्तों में सेलुलर एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। जब कुत्ता मालिक के पास पेट के बल सोता है, तो यह उसकी सबसे सुरक्षित स्थिति मानी जाती है। इसका मतलब है कि वह खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहा होता है। इस दौरान कुत्ते के शरीर में ऑक्सिटोसिन हार्मोन रिलीज होता है।
Published : 22 January 2026, 6:41 PM IST