एक पत्ते पर सजे इतने पकवान कि देखते ही बढ़ जाए भूख! जानिए क्यों खास है Onam की साध्या

ओणम की पहचान सिर्फ फूलों की रंगोली और उत्सव से नहीं, बल्कि केले के पत्ते पर परोसी जाने वाली खास साध्या से भी है। इस पारंपरिक भोज में कई तरह के शाकाहारी व्यंजन एक साथ परोसे जाते हैं। चिप्स और अचार से लेकर सांभर, रसम और पायसम तक इसका स्वाद बेहद खास है। लेकिन साध्या की सबसे दिलचस्प बात सिर्फ इसके पकवान नहीं, बल्कि इसे परोसने और खाने की परंपरा भी है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 August 2026, 3:33 PM IST
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1 / 6 \"Zoom\"केरल का ओणम सिर्फ फूलों की रंगोली, नाव दौड़ और उत्सव का नाम नहीं है। इस त्योहार का एक बड़ा आकर्षण ओणम साध्या भी है। यह पारंपरिक शाकाहारी भोज केले के पत्ते पर परोसा जाता है और इसमें एक साथ कई तरह के पकवान शामिल होते हैं। खास बात यह है कि खाने का स्वाद जितना अलग होता है, उसे परोसने और खाने का तरीका भी उतना ही खास माना जाता है। (Img: Pinterest)
2 / 6 \"Zoom\"मलयालम में ‘साध्या’ का अर्थ दावत या भोज होता है। ओणम के मौके पर तैयार होने वाले इस खास भोजन को ‘ओणसाध्या’ कहा जाता है। इसमें पूरी तरह शाकाहारी व्यंजन बनाए जाते हैं और इसे आमतौर पर दोपहर के समय परोसा जाता है। साध्या में 26 व्यंजनों का जिक्र अक्सर किया जाता है, लेकिन यह संख्या तय नहीं है। परिवार, जगह और आयोजन के हिसाब से पकवानों की संख्या बदल सकती है। बड़े आयोजनों में 30 से ज्यादा व्यंजन भी परोसे जाते हैं।  (Img: Pinterest)
3 / 6 \"Zoom\"साध्या की शुरुआत ही देखने में दिलचस्प होती है। केले के पत्ते पर नमक, पका केला, केले के चिप्स, शर्करा वराट्टी, पप्पडम और अलग-अलग अचार रखे जाते हैं। इंजी पुली भी इसका खास हिस्सा होती है। इसके बाद थोरन, मेझुक्कुपुरट्टी, अवियल, ओलन, कालन, एरिसरी, कूटू करी, पचड़ी, किचड़ी और पुलिसरी जैसे व्यंजन परोसे जाते हैं। हर डिश का अपना स्वाद और अपनी खास पहचान होती है, जिससे एक ही पत्ते पर स्वादों की पूरी दुनिया सज जाती है।  (Img: Pinterest)
4 / 6 \"Zoom\"साध्या के मुख्य भोजन में चोरू यानी चावल के साथ परिप्पु, सांभर और रसम परोसे जाते हैं। खाने का स्वाद यहीं खत्म नहीं होता। आखिर में संभारम यानी मसाला छाछ और कई तरह के पायसम से भोज को पूरा किया जाता है। अदा प्रधमन, पालदा पायसम और परिप्पु प्रधमन जैसे मीठे व्यंजन साध्या का खास आकर्षण माने जाते हैं। इस पूरी दावत में मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा और हल्का कड़वा स्वाद अलग-अलग पकवानों के जरिए संतुलित नजर आता है।  (Img: Pinterest)
5 / 6 \"Zoom\"ओणम साध्या को केवल स्वादिष्ट खाना नहीं माना जाता। यह केरल की संस्कृति, मेहमाननवाजी और साथ मिलकर त्योहार मनाने की भावना को भी दिखाती है। ओणम के दौरान राजा महाबली के स्वागत और खुशहाली की मान्यता से जुड़ा यह उत्सव लोगों को एक साथ लाता है। साध्या में सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यही वजह है कि यह भोज केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि मिल-जुलकर खुशी बांटने की परंपरा का हिस्सा बन गया है।  (Img: Pinterest)
6 / 6 \"Zoom\"साध्या आमतौर पर हाथ से खाई जाती है। चावल और करी को मिलाकर छोटे निवाले बनाकर खाने की परंपरा है। जो व्यंजन नहीं चाहिए, उसे दोबारा परोसने से विनम्रता से मना किया जा सकता है। भोजन पूरा होने के बाद केले के पत्ते को अपनी ओर मोड़ना संतोष और भोजन की सराहना का संकेत माना जाता है। इस तरह एक केले के पत्ते पर सजा यह भोज स्वाद के साथ केरल की परंपरा, समानता और अतिथि सत्कार की कहानी भी सुनाता है।  (Img: Pinterest)

Location :  New Delhi

Published :  25 August 2026, 3:33 PM IST

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